‘कोविड-19’ के संसार-व्यापी संकट से निपटना कोई ‘रॉकेट साइंस’ नहीं है। कुछ सावधानियां बरतकर इससे आसानी से निपटा जा सकता है। सवाल है कि क्या हम अपनी आम, रोजमर्रा की मामूली आदतों को बदलने के लिए तैयार हैं? खासकर तब,…
पिछले साल दिसम्बर में चीन से निकला वायरस ‘कोविड-19’ दुनियाभर को हलाकान किए है। अब तक उससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों ने अपनी जानें दी हैं। क्या इस तबाही का कोई जोड हमारी अर्थव्यवस्था से भी है?…
मध्यप्रदेश की मौजूदा सरकार ने अपने घोषणा-पत्र के मुताबिक ‘मध्यप्रदेश जल का अधिकार (संरक्षण और निरंतर उपयोग) अधिनियम-2020’ क्रियान्वित करने का तय किया है, लेकिन क्या यह कानून राज्य के आम लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करने में…
वन और वन्य-प्राणियों के संरक्षण-संवर्धन में लगी कथित ‘वैज्ञानिक वानिकी’ के हल्ले में हम अपनी उन परम्पराओं को भूलते जा रहे हैं जिनकी बदौलत हमारे पास आज भी वन और वन्यप्राणी सम्पदा बची हुई है। भारी-भरकम किताबी ज्ञान की टक्कर…
एक-के-बाद-एक राज्य में होती राजनीतिक धमाचैकड़ी क्या चुनाव सुधार की आसन्न जरूरत नहीं बता रही? आजकल मध्यप्रदेश में जारी सत्ता का सर्कस क्या चुनाव सुधारों से काबू में किया जा सकता है भारतीय राजनीति में अपराधी तत्वों की बढ़ती जा…
आज के दौर में, जब एक ही विचार, नेतृत्व और उनकी अगुआई में एक ही राजनीतिक जमात का बोलबाला हो, यह जानना सुखद है कि हमारी परंपरा में विपरीत विचारों के बीच वाद-विवाद, सहमति-असहमति की खासी हैसियत रही है। इन…
एक तरह से देखें तो गांधी का समूचा जीवन मतभेदों से निपटते ही बीता, भले ही वे मतभेद संगी-साथियों, परिवार और धुर विरोधी विचारों के हों या फिर अपने हित साधने में लगी देशी-विदेशी सत्ताओं के। इन मतभेदों से निपटने…
पत्रकार अरविन्द मोहन के मुताबिक अभी कुछ महीनों पहले तक जिन महिलाओं को अज्ञात कुल-शील की ‘नॉन-एन्टिटी’ माना जाता था, ‘शाहीन बाग’ ने उन्हें हमारे लोकतंत्र की सर्वाधिक समझदार, संघर्षशील, मुखर संवैधानिक इकाई में तब्दील कर दिया है। किसी भी…
भाषा की समाप्ति को डायनासोर की तरह विलुप्त हो जाने जैसी सहज, प्राकृतिक घटना मानने वाले वरिष्ठ हिन्दी-भाषियों के इस जमाने में भाषा की मौजूदा बदहाली कैसे बताई, समझाई जा सकती है? आसपास की सैकड़ों सक्रिय बोलियों और इतर भाषाओं…
पर्यावरण के संकट, जल-जंगल-जमीन के बाद अब मानवीय जीवन को अपनी गिरफ्त में लेने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में ‘धरती रक्षा दशक’ जैसे आपातकालीन उपायों के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जनवरी 2020 की पहली…