सप्रेस ब्यूरो वैश्विक स्तर पर महात्मा गांधी के संदेशों को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए दिल्ली के राजघाट से दो अक्टूबर को ‘जय जगत यात्रा’ पर निकले गांधीवादी, एकता परिषद के संस्थापक एवं जय जगत यात्रा के संचालक श्री…
कोरोना के बाद विश्व को टिकाने का रास्ता प्रकृति अनुकूलन ही है। प्रकृति के विपरीत समाजवाद में भी पूंजी की परिभाषा अच्छी नहीं थी, इसलिए पूंजीवाद और समाजवाद दोनों में ही प्राकृतिक आस्था नहीं है और प्राकृतिक संरक्षण सिमटा है। जब भी विश्व में प्रकृति के विपरीत ही सब काम होने लगे तो प्रकृति का बडा हुआ क्रोध महाविस्फोट बनता है और उससे प्राकृतिक आपदाएं निर्मित होती है। कोरोना को आपदा भी मान सकते है। महामारी केा प्रलय भी कहा जा सकता है। भारत इस महामारी से अपने परंपरागत ज्ञान आयुर्वेद द्वारा बहुत से कोरोना प्रभावितों को स्वस्थ बना सका है। बहुत लोगों के प्राण बचे है। इस आधुनिक आर्थिक तंत्र ने आयुर्वेद जैसी आरोग्य रक्षण पद्धति को सफल बनने का मौका ही नहीं दिया गया। उसने आर्थिक लाभ के लिए केवल चिकित्सा तंत्र को ही बढावा है।
सुरेंद्रसिंह शेखावत कोविड-19 से बचने के लिए लगाए गए ‘लॉक डाउन’ के तीसरे चरण में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अब कोरोना के बाद क्या? आजादी के सत्तर सालों में हमने उद्योग, शहरीकरण और मशीनीकरण का उपयोग करके देख…
वन विभाग की अध्ययन रिपोर्ट : मध्यप्रदेश में है देश का सर्वाधिक वन क्षेत्र मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा कोरोना को लेकर किये गये अध्ययन की रिपोर्ट से एक महत्पूर्ण तथ्य सामने आया है। कोरोना को ध्यान में रखते हुए प्रदेश…
16 और 27 मई को होगी 234 किसान संगठनों की देशव्यापी कार्यवाही अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) ने 16 मई को लॉक डाऊन सावधानियों का पालन करते हुए अपने घरों के आंगनों और छतों तथा 27 मई को गांव/ग्राम पंचायत…
जागृत आदिवासी दलित संगठन ने भेजे मुख्यमंत्री को मजदूरों हित में सुझाव बड़वानी जिले में सेंधवा के बीजासन घाट में रोज महाराष्ट्र सरकार द्वारा निरंतर फंसे मजदूरों को भेजा जा रहा है लेकिन लॉकडाउन में फंसे इन मजदूरों को मध्य प्रदेश शासन-प्रशासन…
‘जन आंदोलनों काराष्ट्रीय समन्वय’ ने की श्रमिकों के हित के लिए मांगें ‘जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय’ (एनएपीएम) ने कहा है कि देश के संसाधनों के संरक्षण और उसके साथ एक आत्मनिर्भर तथा विषमता रहित देश, गाँव व समाज की बात हमेशा…
कोरोना के प्रकोप ने हमारे सामने, भले ही परोक्ष रूप से, विकास की वैश्विक अवधारणा का एक बेहद जरूरी सवाल खडा कर दिया है। यानि विकास के नाम पर आज तक हम जो और जैसा करते रहे थे, वह दरअसल…
कोरोना वायरस ने इन दिनों दुनियाभर में खलबली मचा दी है। अमीर-गरीब, ऊंचा-नीचा, काला-गोरा, गरज कि हर नस्ल और फितरत के इंसान को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है। इससे कैसे निपटा जाए? यह सभी को बार-बार बताया…
महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के सुदूर इलाकों से आई भीड की हिंसा की ताजा खबरों ने सभी को बेचैन कर दिया है। बे-वजह और आमतौर पर कमजोरों पर होने वाली ये घटनाएं मॉब-लिंचिंग सरीखी वीभत्सता में भी तब्दील हो…