Year: 2019

हिंसक समाज में गांधी

गांधी के अहिंसक तौर-तरीकों से आजाद हुए हमारे देश में अब हिंसा व्यापक और गहरे रूपों में हर कहीं मौजूद है। अहिंसा को स्थापित करने में लगे कुछ लोगों को समाज ने हाशिए पर बैठा दिया है। ऐसे में विकास…

क्रांति और साधना का अद्भुद संगम: जयप्रकाश नारायण

हमारे समय,खासकर आजादी के बाद के इतिहास में जयप्रकाश नारायण का होना एक महत्वपूर्ण पडाव की तरह है। सत्तर के दशक में ‘सम्पूर्ण क्रान्ति’ आंदोलन की अगुआई करते हुए उन्होंने पहली बार तत्कालीन राजसत्ता को चुनौती दी थी और देश…

रिश्तों की मित्रता, मित्रता के रिश्ते

भारतीय संत परम्परा के आधुनिक चिंतकों में आचार्य विनोबा भावे का नाम शीर्षस्थ है। कई विषयों पर उनका चिंतन मौलिक और सबसे अलग हटकर है। मसलन-वे मानते हैं कि सभी रिश्तों में मित्रता सर्वोपरि है और आम मानवीय संबंधों को…

कैसे जलते हैं, दुनिया के फेफड़े

दुनियाभर को प्राणवायु यानि ऑक्सीजन मुहैय्या करवाने वाले अमेजान के जंगलों में लगी आग इन दिनों सर्वत्र चर्चा और चिंता का विषय बनी हुई है। अमीर देशों के ‘ग्रुप-7’ और ‘ग्रुप-20’ जैसे वैश्विक मंचों तक को हलाकान करने वाली इस…

सत्ता की मार्फत नहीं बदल सकेगा समाज

महेन्द्रकुमार राजनीति के द्वारा सत्ता प्राप्त करके ही सेवा की जा सकती है। यानि गांवों की सेवा कोई बहुत बड़ा बिच्छू है और उसे राजसत्ता के चिमटे से पकड़ा जाए। राजनीति में पड़े हुए कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें…

बिजली का बेहतर विकल्प हो सकती है, अक्षय ऊर्जा

नीलेश दुबे  ऊर्जा की खपत से विकास को मापने के इस दौर में ऊर्जा उत्पादन के तरीकों पर गहराई से विचार करने की जरूरत है। क्या हम व्यापक विस्थापन, भारी पर्यावरण विनाश और असीमित आर्थिक बदहाली की कीमत पर पारम्परिक…

सर्वस्व ‘लुटाने’ वाले बांध प्रभावितों से राजनीति करती रहीं, पिछली सरकारें

नर्मदा पर बने ‘सरदार सरोवर’ बांध के विस्थापितों को बरसों बाद अपने हक में कुछ सकारात्मक होता दिखाई दिया है। पिछली केन्द्र और राज्य सरकारों के ‘शून्य’ विस्थापन-पुनर्वास मानने के बरक्स मध्यप्रदेश की नई सरकार ने विस्थापितों की उनके गांवों…

सचमुच वे गुमनाम नींव की ईंटें भी प्रणम्य हैं

किसी व्यक्ति की महानता उसके समय, परिवेश और परिजनों पर भी निर्भर करती है। महात्मा गांधी को भी अपने सबसे बड़े भाई से ऐसा साथ, सहयोग, सहायता मिलती रही। बुलन्द इमारत पर रीझना स्वाभाविक है, लेकिन नींव की वे ईंटें…

कमी पानी की नहीं, उसे वापरने की तरकीब की है

22 मार्च – विश्‍व जल दिवस पर‍ विशेष पानी की कमी ने अब दो बातों पर ऊंगली रखी है-एक, क्या पानी का टोटा सचमुच ऐसा है जिससे निपटने के लिए ‘तीसरा विश्वयुद्ध’ छेड़ना पडे ? और दूसरे, क्या उस ‘अपराधी’…

क्या प्रदूषण को काबू कर सकते हैं, बिजली के वाहन?

दुनियाभर में वायु प्रदूषण के लिए वाहनों की बढ़ती संख्या भी जिम्मेदार है। फैलते बाजार और उसकी मार्फत कमाए जाते राजस्व ने सरकारों को इसे अनदेखा करने को उकसाया भी है, लेकिन बढ़ते तापक्रम और नतीजे में जलवायु परिवर्तन की…