Journalism

मीडिया : ‘फेक न्यूज़,’ फर्जी पत्रकार और लोकतंत्र का संकट

आज के दौर का मीडिया, खासकर ‘सोशल मीडिया’ अपने द्वारा परोसी गई सूचनाओं से नागरिकों को जागरूक बनाए रखने की बुनियादी जिम्मेदारी से कहीं आगे बढ़ चुका है। उसकी इस ‘प्रगति’ ने जहां एक ओर नागरिकों को अपने आसपास की…

गाँधी : धीमी पत्रकारिता का सत्याग्रही संपादक

सबको मालूम है कि गाँधीजी कमाल के पत्रकार-संपादक थे। उनका अधिकांश लेखन अखबारों के लेख-टिप्पणियों, पत्रों और सूचनाओं की शक्ल में मौजूद है। अलबत्ता, लेखन की इस प्रक्रिया में वे अपने पाठक भी तैयार करते थे। कोई उनके (या किसी…

पत्रकारिता की नैतिकता और प्रेस की स्वतंत्रता

राष्ट्रीय प्रेस दिवस (16 नवम्बर) राष्ट्रीय प्रेस दिवस वास्तव में प्रेस की स्वतंत्रता तथा समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारियों का प्रतीक है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 में भारतीयों को दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार से देश में…

स्‍मृति शेष : उसूलों पर अडिग रहने वाले पत्रकार शीतला बाबू

स्‍मृति शेष : शीतला सिंह पत्रकारिता के पितामह कहलाने वाले देश के वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह अभी कुछ दिन पहले हम सबसे सदा के लिए विदा हुए हैं। ‘सप्रेस’ का उनसे सम्बंध रहा था। प्रस्तुत है, निमीषा सिंह की लिखी…

पुष्पेंद्र पाल सिंह : पत्रकारिता, विचार और लेखन के स्वर्णिम युग का अवसान

पत्रकारिता- सामाजिक-राजनीतिक-प्रशासनिक हस्तियों ने दी सोशल मीडिया पर भावपूर्ण आदरांजलि भोपाल, 7 मार्च। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक  प्रो. पुष्पेन्द्रपाल सिंह का 7 मार्च की सुबह हृदयाघात से निधन होने से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर…

सप्रेस सेवा का 63वें वर्ष में प्रवेश : मूल्‍य आधारित पत्रकारिता के नये प्रतिमान गढ़ने की दिशा में पहल जारी

इंदौर ।  1 मई 2022 को सर्वोदय प्रेस सर्विस (सप्रेस) ने अपनी स्‍थापना के 62 वां वर्ष पूर्ण कर 63 वें वर्ष में प्रवेश किया है। इन 6 दशक के सफर में सप्रेस ने हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में मूल्‍यगत…

मूल्यहीन मीडिया और लोकतंत्र

हमारे समय का मीडिया शायद सर्वाधिक सवालों का सामना करने वाला मीडिया है। इक्का-दुक्का उदाहरणों को छोड दें तो चहुंदिस उसे लेकर एक नकारात्मक छवि ही दिखाई पडती है। ऐसे में मीडिया की सबसे महत्वपूर्ण कडी की बदहाली में आखिर…