गाँधी : धीमी पत्रकारिता का सत्याग्रही संपादक
सबको मालूम है कि गाँधीजी कमाल के पत्रकार-संपादक थे। उनका अधिकांश लेखन अखबारों के लेख-टिप्पणियों, पत्रों और सूचनाओं की शक्ल में मौजूद है। अलबत्ता, लेखन की इस प्रक्रिया में वे अपने पाठक भी तैयार करते थे। कोई उनके (या किसी…
‘गांधी-150’ : अपनी अप्रासंगिकता का पड़ाव
आज, महात्मा गांधी को विदा हुए सात दशकों बाद, कोई यदि उन्हें समझना, आत्मसात करना और जीवन में उतारना चाहे तो क्या करे? गांधी को साक्षात देखने और साथ काम करने वाले संगी-साथी और उनकी बनाई संस्थाएं अब नकारा हो…

