Jayprakash Narayan

संपूर्ण क्रांति के पुन: उद्घोष के लिए 5-7 अप्रैल को मुंबई में होगा राष्ट्रव्यापी जुटान

लोकनायक जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति के पूरे हुए पचास साल मुम्‍बई । देश के जाने माने राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर ने कभी अपनी कविताओं में जयप्रकाश के बारे में कहा है है जयप्रकाश वह, जो न कभी सीमित…

इंदिरा की नज़रों में जेपी की हैसियत आम आदमी जितनी ही थी ?

लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) : 11 अक्टूबर जन्मदिन लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) का आज (ग्यारह अक्टूबर) जन्मदिन है। तीन दिन पहले आठ अक्टूबर को उनकी पुण्य तिथि थी। सोचा जा सकता है कि जेपी आज अगर हमारे बीच होते तो…

क्या दलीय लोकतंत्र से आगे कोई रास्ता नहीं है?

जयप्रकाश नारायण क्या वर्तमान दलीय लोकतंत्र का कोई विकल्प हो सकता है? और यदि हो सकता है तो उसका स्वरूप कैसा होगा? इस सिलसिले में प्रस्तुत है, ‘सप्रेस’ के भंडार में से देश के मूर्धन्य नेता, स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी स्व. श्री…

स्वाधीनता याने आत्मा की स्वाधीनता                 

जयप्रकाश नारायण 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस स्वाधीनता मेरे लिए कई अर्थ रखती है । पर सबसे अधिक मेरे लिए यह आत्मा की स्वाधीनता का अर्थ रखती है, विचारों की स्वाधीनता का और तब कहीं जाकर कर्म की स्वाधीनता…

बेरोजगारी के मुद्दे पर बड़े आंदोलन का आगाज;देश के विभिन्न हिस्सों में शुरू होगा आंदोलन

देश में बढ़ रही बेरोजगारी के सवाल पर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई है। सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक व युवा संगठनों से बातचीत कर फाइनल ड्राफ्ट तैयार होगा। ‘रोजगार के अधिकार’, को मौलिक अधिकारों में शामिल कराने के…

लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने पूछा था :आंदोलन क्या बूढ़े चलाएँगे ?

जेपी एक ऊर्जा थे ,रोमांच थे, आत्मीयता से भरी हुई एक प्रतीक्षा थे।आज़ादी के इतिहास को नए सिरे से लिखने की क्रूरता जब किसी दिन थक कर पस्त हो जाएगी, आइंस्टीन जैसा ही कोई संवेदनशील वैज्ञानिक विनोबा और जेपी जैसे…

सत्ता को सीमा बताने वाले, जेपी

हमारे समय में ऐसे कई महानायक हुए हैं जिन्होंने इतिहास की धारा को बदलने के प्रयास किए हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति लोकनायक जयप्रकाश नारायण रहे हैं जिनकी अगुआई में देश में तानाशाही की पहली कोशिश को सफलतापूर्वक रोका गया…

जेपी का इस्तेमाल छोड़ें, उन्हें समझने की कोशिश करें

जेपी की संपूर्ण क्रांति के मूल में स्वतंत्रता समता और बंधुत्व की ही अवधारणा है। उन्होंने उसे भारतीय संदर्भ और अपने अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से नया रूप दिया था। वे अपनी नैतिकता में हमारी पतित होती राजनीतिक व्यवस्था का शुद्धीकरण करना…

जयप्रकाश के साथ होना

जयप्रकाश नारायण जन्मदिन : 11 अक्‍टूबर हमारे देश में सत्तर का दशक भारी उथल-पुथल का रहा है। इन्हीं दस सालों में नक्सलवाद पनपा, बांग्लदेश की लड़ाई हुई, बिहार में ‘सम्पूर्ण क्रांति’ और गुजरात में ‘नवनिर्माण’ आंदोलन खड़े हुए, पहली बार…