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चुनावी राजनीति : मत विभाजन का रूकना 2024 में महत्वपूर्ण निर्णायक मुद्दा है!

भारतीय चुनाव सीधे-सीधे केवल अंक गणित की तरह नहीं होता है। भारतीय चुनाव में एक पक्षीय चुनाव परिणाम भी आते रहें हैं तो खण्डित जनादेश भी आये हैं। आजादी आन्दोलन के बाद स्वाधीनता मिलने पर शुरुआती दौर में भारतीय राजनीति…

आम चुनाव : मोदीजी ने क्यों पूछा कि क्या इंदौर में ज़्यादा वोटिंग नहीं होगी ?

राज्य में हुकूमत भाजपा की ही है फिर भी मोदीजी की पार्टी डरी हुई है ? डर का कारण इतना भर है कि चार जून को मोदी जी के सामने मुँह कैसे दिखाना है ! ‘बम कांड’ के कारण चर्चा…

पोहे-कचोरी भूल जाइए! ‘स्वच्छ’ इंदौर को अब इस ‘शर्म’ के लिए याद रखिए!

श्रवण गर्ग लता मंगेशकर, कर्नल सी के नायडु,उस्ताद अमीर खाँ और एम एफ़ हुसैन जैसी हस्तियों के शहर इंदौर के कोई 25 लाख मतदाता हैरान-परेशान हैं कि अब 13 मई को उन्हें क्या करना चाहिए जिस दिन चौथे चरण का…

चुनाव को समझने का एक सरल गणित

राजनीति में रूचि रखने वाले लोग चुनाव के रिजल्ट को आइंसटीन के कठिन सूत्रों की तरह समझने की कोशिश करते रहते हैं और इस कोशिश में वे किसी नेता की सभा में आई भीड़, टेलीवीजन चैनल, मीडिया, व्हाट्सएप आदि के सहारे अपने-अपने अनुमान…

गलतियों का हिमालय : जनता को तो अहसास होना ही चाहिए

आजादी की लड़ाई की शुरुआत की बात है। गांधीजी ने ‘असहयोग आंदोलन’ का आह्वान किया था। वैसी देशव्यापी हड़ताल इतिहास में कभी देखी नहीं गई थी ! लगने लगा था कि अंग्रेजों के पांव उखड़ जाएंगे, लेकिन तभी गांधीजी ने अचानक पूरा आंदोलन…

पांच राज्यों के चुनाव परिणाम : नतीजों के निहितार्थ

हाल के पांच राज्यों के चुनाव परिणाम देश की दोनों पार्टियों – भाजपा, कांग्रेस के तौर-तरीकों को भी उजागर करते हैं। ये बताते हैं कि इन पार्टियों ने किन तरीकों से अपनी-अपनी चुनावी समर लडी है। क्या हैं, इन दोनों…

मतदान में प्रयुक्त अमिट स्याही का विज्ञान

चक्रेश जैन फर्ज़ी मतदान रोकने में ‘अमिट स्याही’ की अहम भूमिका रही है। अमिट स्याही की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे मिटाया अथवा धोया नहीं जा सकता। बैंगनी रंग की यह स्याही आम चुनाव का प्रतीक बन गई…

क्या यूपी में 2024 की तैयारियाँ प्रारंभ हो गईं हैं ?

यूपी में जो कुछ भी चल रहा है क्या उसे 2024 की तैयारियों के साथ जोड़कर भी देखा जा सकता है ? अगर ऐसा ही है तो आने वाले दिनों में और भी काफ़ी कुछ देखने-समझने की तैयारी रखना चाहिए…

लोकतंत्र : सत्ता का चहेता ‘चुनाव आयोग’

केन्द्र की सत्ता पर काबिज पार्टियों की मनमर्जी से मनचीते चुनाव आयुक्तों की बहाली पर अब सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले से रोक लगने की संभावना है,लेकिन क्या यह मौजूदा राजनीतिक जमातों के चलते संभव होगा? क्या बेलगाम लोकतांत्रिक…

पांच राज्यों में चुनाव : खारिज होता पर्यावरण

पांच राज्यों की विधानसभाओं के आसन्न चुनावों में हमेशा की तरह वे सभी धतकरम किए जा रहे हैं जिन्हें हमारे मौजूदा तर्ज के लोकतंत्र ने आत्मसात कर लिया है, लेकिन क्या इस धमा-चौकडी में हमारे जीवन के लिए जरूरी पर्यावरणीय…