विनायक नरहरि भावे यानी विनोबा भावे (11सितंबर 1895-15 नवंबर 1982) की आज 129 वीं जयंती है। आज विनोबा न सिर्फ इसलिए प्रासंगिक हैं कि वे हिंदू धर्म ही नहीं, इस्लाम, ईसाई और अन्य धर्मों के उदार और अप्रतिम व्याख्याकार हैं…
11 सितंबर : विनोबा भावे जयंती महात्मा गांधी की आध्यात्मिक, रचनात्मक विरासत सम्भालने वाले विनोबा भावे ने गांधी के जाने के बाद सेवाग्राम (वर्धा) में पूर्व-निर्धारित रचनात्मक कार्यकर्ताओं की राष्ट्रीय बैठक में तो अधिक कुछ नहीं कहा, लेकिन बाद में…
वाराणसी । स्वतंत्रता आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही आचार्य विनोबा भावे की 129 वीं जयंती 11 सितंबर से सर्व सेवा संघ, राजघाट, वाराणसी परिसर के विध्वंस के विरुद्ध और पुनर्निर्माण के लिए 100 दिन का सत्याग्रह प्रारंभ हो रहा है, जो…
आज से 76 साल पहले महात्मा गांधी हम सबसे सदा के लिए विदा हुए थे। उनके जाने के बाद का समय हमारे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास का समय रहा है, लेकिन इस दौर में गांधी एक प्रस्थान–बिन्दु की तरह…
तुषार बाबू अपने व्यक्तिगत जीवन में गांधी विचार के सच्चे अनुयाई थे। अपने एक रिश्तेदार के घर भोज में दलितों के लिए अलग पंगत की व्यवस्था देख उन्होंने विरोध किया और बात न मानने पर वहां से सपरिवार लौट आये…
हमारे समय की बदहाली से निपटने में महात्मा गांधी और उनके सिद्धांन्त एक कारगर औजार हो सकते हैं। हिंसा, आपसी वैमनस्य, गला-काट प्रतिस्पर्धा, साम्प्रदायिक कटुता आदि से निपटने और उनके सामने सीधे खडे हो पाने में गांधी के विचार ही…
महात्मा गांधी ने आजाद भारत के लिए कई तरह की योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतियों की कल्पना की थीं, लेकिन दुर्भाग्य से वे आजादी के साढे पांच महीनों में ही हम से सदा के लिए विदा हो गए। बाद में उनके…
चंबल घाटी की दस्यु समस्या के समाधान के लिए जो काम सरकारें सदियों से नहीं कर पाई वह कार्य सर्वोदय कार्यकर्ता करने में सफल रहे। मैत्री से ही मिटे बैर को बाबा विनोबा तथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में…
सम्मेलन का घोषवाक्य होगा ‘शांति और न्याय के लिए युवा’ जौरा, मुरैना (म.प्र.)। 48 वें अखिल भारतीय सर्वोदय समाज सम्मेलन का आयोजन 14, 15,16 अप्रैल 2022 को जौरा (मुरैना) में होने जा रहा है। दारूण कोरोना काल की भीषण त्रासदी के दो…
महात्मा गांधी भी न केवल फांसी की सजा के विरोध में थे, वरन उन्होंने हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त, क्रांतिकारियों, नजरबंद लोगों की रिहाई की मांग लार्ड इरविन से की, जिन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने बिना मुकदमा चलाए, बिना अभियोग लगाए या…