Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

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वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत सुंदरलाल बहुगुणा सम्मान से सम्मानित

नई दिल्ली, 24 नवंबर । काका साहब कालेलकर और विष्णु प्रभाकर की स्मृति में गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा और विष्णु प्रभाकर प्रतिष्ठान की ओर से सन्निधि सभागार में आयोजित एक समारोह में पर्यावरण के क्षेत्र में निरंतर रचनात्मक लेखन करने…

द साबरमती रिपोर्ट : सिनेमा के पर्दे पर राजनीति का खेल

भारती पंडित फिल्‍म समीक्षा मीडिया में तो राजनीति का दखल हम देख ही रहे थे, अब फिल्मों में राजनीतिक दखल के क्या मायने होते हैं, इस फिल्म को देखने से आप समझ पाएँगे | सीधे और छुपे रूप से नफरत…

सावधान! आपकी थाली के शाकाहार में छुपा हो सकता है मांसाहार

मालवा निमाड़ के खेतों में पैदा होने वाली सरसों के साथ बैंगन, सोयाबीन आदि जैसी फसलों और साग-भाजी के साथ फल आपकी थाली में परोसे जाएं और इनके शाकाहारी या मांसाहार होने का भेद नहीं कर पाए तो क्या होगा? ऐसे प्रकृति…

जीवन से जुड़ी आजीविका

जीवन की तरफ पीठ देकर खड़ी की जा रही समृद्धि ने क्या हमें उस बुनियादी सुख से भी वंचित कर दिया है, जो इस तमाम खटराग का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए? और यदि यह सही है तो फिर क्या हमें…

पलायन और विस्थापन नियति है आदिवासियों की

निमिषा सिंह देश की आबादी में अनुसूचित जनजाति के लोगों की तादाद 8.6% है, लेकिन विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की कुल संख्या में अनुसूचित जनजाति के लोगों की तादाद 40 प्रतिशत है। जाहिर है, जनजातीय लोगों को जो भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची से आच्छादित हैं, भूमि-अधिग्रहण, विस्थापन…

देश का पिछड़ता पर्यावरण

जिन वन और वन्यप्राणियों को इंसानी हस्तक्षेप से बचाने की खातिर समूची सरकारी ताकत जंगलों में बसे इक्का-दुक्का गांवों को खदेड़ने में लगी है, उन्हीं वनों को दान-दक्षिणा में पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है। क्या इस तरह की मौजूदा…

ओडिशा में सर्वोदय आंदोलन पर केंद्रित महत्वपूर्ण पुस्तक का विमोचन

सर्वोदय त्याग और सृजन का इतिहास है – चंदन पाल भुवनेश्वर, 17 नवंबर।  महात्मा गांधी के सर्वोदय विचार और स्वतंत्रता के बाद समानता व समृद्धि के साथ एक नए भारत के निर्माण की परंपरा को याद करते हुए, ओडिशा में…

दिल्‍ली : हर साल सांसों का ये कैसा आपातकाल?

दिल्ली में इन दिनों एक प्रकार से सांसों का आपातकाल सा दिखाई दे रहा है, जहां चारों ओर स्मॉग की चादर छाई दिखती है। स्मॉग की यह चादर कितनी खतरनाक है, इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि…

वेपराइजेशन ऑफ़ हिंदू फेस्टिवल : त्यौहारों के तनाव

हमारे यहां त्यौहार सदियों से आपसी मेल-जोल और सामूहिक आनंद के प्रतीक रहे हैं और आमतौर पर इन्हें धर्म की बजाए क्षेत्रीय विशेषताओं के आधार पर मनाया जाता है। बंगाल में दुर्गा-पूजा या गुजरात में नवरात्रि धर्म की बजाए स्थानीयता…

स्‍मरण : अन्न परंपरा के लिए जूझ रहा था – देबजीत सरंगी

आज के खाऊ-उडाऊ विकास के सामने कई लोग अपनी परम्पराओं, पद्धतियों को लेकर निष्ठा से डटे हैं। उनमें से एक देबजीत सरंगी भी थे। पिछली मई में करीब 54 साल की उम्र में उनका सदा के लिए विदा होना दुखद…