नया टैक्स बिल 2025: पारदर्शिता या डिजिटल निगरानी?
नया टैक्स बिल 2025 कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने का प्रयास करता है। यह डिजिटल कराधान, क्रिप्टोकरेंसी और अनिवासी भारतीयों से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। हालाँकि, इसमें निजता की…
शिक्षा का ‘असर’ : कुछ सुधरती स्थिति
‘शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट’ यानि ‘एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट’ (‘असर’) 2005 से एक एनजीओ ‘प्रथम’ द्वारा हर दूसरे साल प्रकाशित की जाती है। ‘असर’ एक नागरिक पहल पर होने वाला घरेलू सर्वेक्षण है जो बच्चों की स्कूली शिक्षा…
बेहतर समाज के लिए साम्प्रदायिक सद्भाव की रक्षा करें
सत्ता पर काबिज होने की ललक ने हमारी राजनीतिक जमातों को साम्प्रदायिक बना डाला है, लेकिन क्या इससे हम एक बेहतर समाज बना पाएंगे? प्रस्तुत है, इसी की पड़ताल करता कुलभूषण उपमन्यु का यह लेख। हम भाजपाई हो सकते हैं…
सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा की जीवन संगिनी विमला बहुगुणा की देह पंचतत्व में विलीन
देहरादून, 15 फरवरी। चिपको आंदोलन एवं गांधी विचारों के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले सुंदरलाल बहुगुणा की पत्नी विमला बहुगुणा का बीते 14 फरवरी को 2:10 मिनट पर देहान्त हो गया। शनिवार 5 फरवरी को उनकी देह पंचतत्व…
जलवायु बदलाव : ‘स्वराज संवाद’ की जरूरत
आजादी के बाद जिस अवधारणा को बार-बार याद करने की जरूरत है, वह स्वराज है। गांधी की मार्फत आई हमारे देसी समाज की यह अवधारणा अनेक संकटों की समझ देकर उनसे निजात दिला सकती है। कुछ समाजसेवी हैं जो यदा-कदा…
बड़वानी का 60वां सर्वोदय मेला : गांधीजी की विरासत को जीवंत रखने का प्रयास
प्रो. आर के जैन “अरिजीत” मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में 12 फ़रवरी की सुबह जब सूरज अपनी स्वर्णिम किरणें बिखेरता है, तब नर्मदा के पावन तट पर एक ऐतिहासिक आयोजन सजीव हो उठता है—सर्वोदय मेला। यह मेला केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं, बल्कि महात्मा गांधी, कस्तूरबा…
डॉक्टरों की बढ़ती आत्महत्याएं : चिकित्सकों को चिकित्सा की जरूरत
भांति-भांति की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक समस्याओं के अलावा खुद के मुकाबले मरीजों की बढ़ती संख्या डॉक्टरों को गहरे तनाव का शिकार बना रही है। नतीजे में जीवन देने वाले डॉक्टर खुद अपनी जान लेने को उतारू हो रहे हैं। आखिर क्यों हो…
नर्मदा संरक्षण के लिए जरूरी नहीं है, “भक्त” होना
राजेन्द्र जोशी दुनियाभर में हमारा देश अकेला है जहां नदियों की भक्ति को अहमियत दी जाती है। चार फरवरी को ‘नर्मदा जयन्ती’ है जिसमें हम हर साल की तरह फिर नर्मदा को भक्तिभाव से याद करेंगे, लेकिन क्या इस कर्मकांड…























