डॉ. एस. एन. सुब्बराव : एक महान समाजसेवी और युवा प्रेरक

7 फरवरी : 96वां जन्मदिवस

अनिल

डॉ. एस. एन. सुब्ब राव, जिन्हें स्नेहपूर्वक “भाई जी“ के नाम से जाना जाता है। भारतीय समाज के एक अद्वितीय नायक और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे। 7 फरवरी को उनकी 96वां जन्मदिवस मनाया जा रहा है। उनका जीवन और कार्य राष्ट्र सेवा के अद्वितीय आदर्शों का प्रतीक है। वे एक अद्वितीय प्रेरक भी थे, जिन्होंने लाखों युवाओं को भारत माता की सेवा के लिए प्रेरित किया।

अनिल कुमार गुप्ता

डॉ. एस. एन. सुब्ब राव, जिन्हें स्नेहपूर्वक “भाई जी“ के नाम से जाना जाता है। भारतीय समाज के एक अद्वितीय नायक और प्रेरणादायक व्यक्तित्व थे। उनका जन्म 7 फरवरी 1929 को कर्नाटक में बैंगलोर के नजदीक सेलम में हुआ था और इस वर्ष उनकी 96वीं जयंती मनाई जा रही है। उनका जीवन और कार्य राष्ट्र सेवा के अद्वितीय आदर्शों का प्रतीक है। वे एक अद्वितीय प्रेरक भी थे, जिन्होंने लाखों युवाओं को भारत माता की सेवा के लिए प्रेरित किया।

यह वह समय था, जब चंबल घाटी में डाकुओं का आतंक चरम पर था और क्षेत्र में भय और अशांति फैली हुई थी। भाई जी ने अपने अद्वितीय साहस, धैर्य और प्रभावी संवाद कौशल के माध्यम से इन डाकुओं को मुख्यधारा में वापस लाने का महान कार्य किया। भाई जी ने अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा 1970 के दशक में चंबल के डाकुओं के पुनर्वास के लिए समर्पित किया। उन्होंने उन्हें समाज में पुनः स्थापित करने के लिए अहिंसात्मक जीवन शैली, खेती-किसानी, कुटीर उद्योग का प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान किए जिससे उनकी जिंदगी में सकारात्मक परिवर्तन आया।

भाई जी का मानना था कि राष्ट्रीय सेवा योजना केवल छात्रों को ही सामुदायिक सेवा के जरिए उनका व्यक्तित्व और चरित्र विकसित करता है और छात्रों को सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों में हिस्सा लेने का मौका देती है। ठीक उसी तरह से युवाओं के लिए भी एक योजना होनी चाहिए जिससे देश की तरुणाई को सामाजिक सेवा के जरिए उनमें व्यक्तित्व और चरित्र विकास का अवसर मिलना चाहिए। इसलिए उन्होंने राष्ट्रीय युवा योजना की स्थापना भी की।

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भाई जी ने राष्ट्रीय युवा योजना के माध्यम से युवा शक्ति को संगठित और प्रेरित करने का कार्य किया। उन्होंने न केवल देश भर के युवाओं को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया, बल्कि उन्हें समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उनके नेतृत्व में, युवाओं ने समाज सेवा, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भाई जी का मानना था कि युवा शक्ति ही राष्ट्र की असली ताकत है और उन्होंने इस सिद्धांत को अपने जीवन में चरितार्थ किया।

उनके नेतृत्व में 90 की दशक में संचालित सद्भावना रेल यात्रा तीन चरणों में देश भर के प्रमुख शहरों से गुजरते हुए सद्भावना रैली और सर्वधर्म प्रार्थना सभा के माध्यम से लोगों में सर्व-धर्म मम्-भाव को मजबूत किया। प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, साइक्लोन, चक्रवात अथवा भूकम्प से अथवा दंगा-फसाद से पीड़ित मानवता के जख्मों पर मरहम लगाने में हमेशा अग्रणी भूमिका का निर्वाह करते हुए उन्होंने फौरी तौर पर युवाओं का शिविर आयोजित कर लोगों को राहत प्रदान किया। देश भर के अहिंसक जनांदोलनों और रचनात्मक कार्यों से जुड़े समाजकर्मियों को भाई जी ने हौसलाफजाई की और नैतिक रूप से मदद भी।

मधुर आवाज में भजनों का गायन और श्रोताओं को प्रेरणादायक गीत सामूहिक गान में शामिल कर, ओत-प्रोत करने कला उनके पास थी। जिससे वे लोगों को देश सेवा और मानवता की सेवा के लिए प्रेरित कर लेते थे। उनके पास विलक्षण संवाद कौशल था। इस कार्य में उनका भाषाई ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण था। भाई जी देश की सभी राज्यों में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं को बोलने वाले लोगों को उनकी ही भाषा में बातचीत कर लेते थे।

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भाई जी की जीवन कहानी हमें यह सिखाती है कि दृढ़ संकल्प, साहस और सेवा भाव के माध्यम से हम समाज में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकते हैं। उनका जीवन और कार्य हमें प्रेरणा देते हैं कि हम अपने समाज और राष्ट्र के लिए क्या कुछ कर सकते हैं। उनकी 96वीं जयंती पर, हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और समाज सेवा के प्रति अपने संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा मिलती है।

वे सदा चम्बल के बागियों के लिए “सुब्बाराम” तो युवाओं के लिए “भाई जी” और बच्चों के लिए “फुग्गावाले दादा जी” बने रहे। भाई जी अपने जेब में गुब्बारे रखते थे और छोटे-छोटे बच्चों को गुब्बारा देकर रिझा लेते थे, इसलिए बच्चे उनको फुग्गा वाले दादा जी पुकारते थे। भाई जी देश भर में बहुत सारी नामचीन संस्थाओं को नेतृत्व प्रदान किया, जो जन सारोकार के मुद्दों पर विकासीय कार्य करती हैं।

भाई जी युवाओं से “एक घंटा देश को और एक घंटा देह को” देने की अपील करते थे। उनका मानना था कि देश की तरुणाई को नियमित रूप से अपने देश के लिए एक घंटे का योगदान करना चाहिए और एक घंटा अपने शरीर को देना चाहिए। देश की एकता और अखंडता के लिए भाई जी भारतीय बहु भाषा गीत की प्रस्तुति करते थे उनका मानना था कि भारत एक अद्भुत देश है जहाँ भाषा, धर्म, संस्कृति, वेश भूषा, और विचारधारा की विभिन्नताओं के बीच एक मजबूत एकता है जिसे अक्षुण्‍ण बना कर रखा जाना चाहिए। 

भाई जी के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें और समाज सेवा के प्रति अपने दायित्व को पूरी निष्ठा के साथ निभाएं। डॉ. एस. एन. सुब्बराव (भाई जी) का जीवन और कार्य भारतीय समाज के लिए एक प्रेरणादायक दृष्टांत है। उनके योगदान को याद करते हुए, हम अपने समाज और राष्ट्र की सेवा के प्रति अपने संकल्प को और दृढ़ करते हैं।

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लेखक एक सामाजिक कार्यकर्त्ता है और एकता परिषद से जुडे है।

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