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अर्थनीति का नया छलावा : स्वदेशी की ओट में पूँजी का खेल

देश में जीएसटी घटाने की चर्चा “स्वदेशी” के नाम पर हो रही है, पर असल में यह कदम गरीबों पर पड़े कर के बोझ को घटाने की बजाय बड़े पूँजीपतियों को राहत देने जैसा है। स्वदेशी का अर्थ आत्मनिर्भरता, समानता…

सौ साल का ‘आरएसएस’

ठीक एक शताब्दी पहले, 1925 के दशहरे के इन्हीं दिनों में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ की स्थापना हुई थी। उसके कर्ता-धर्ताओं की नजर में गैर-राजनीतिक, सांस्कृतिक संगठन माना जाने वाला यह अ-पंजीकृत जमावडा अपने जन्म से ही विवादास्पद रहा है। क्या…

जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत : मध्‍यप्रदेश एवं राजस्‍थान के मुख्‍यमंत्रियों से कठोर कार्रवाई की मांग

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (मध्‍यप्रदेश व राजस्थान इकाई) द्वारा दोषियों पर दंड और गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र की जवाबदेही तय करने की अपील इंदौर/छिंदवाड़ा/जयपुर, 05 अक्टूबर। मध्यप्रदेश और राजस्थान में जहरीले रसायनों से युक्त कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की…

कहानीकार दिनेश भट्ट का कहानी पाठ : अव्यक्त दुःख को अभिव्यक्ति देतीं कहानियाँ

इंदौर, 4 अक्टूबर। हिंदी में कहानी का कलेवर आमतौर पर छोटा होता है और उपन्यास या लंबी कहानी की तरह उसमें एक से ज़्यादा मुद्दे उठाने की गुंजाइश नहीं होती। दिनेश भट्ट अपनी कहानी में यह जोख़िम उठाते है और…

गांधीजी की आधुनिकता और उनके मापदंड

आम लोगों में महात्मा गांधी को उनके रहन-सहन, खान-पान और भाषा-भूषा के चलते गैर-आधुनिक, पिछडा और पारंपरिक मानने का चलन है, लेकिन क्या वे सचमुच वैसे थे? या आधुनिकता के उनके मापदंड आम लोगों से भिन्न थे, जिनका वे कडाई…

महात्मा गांधी के विचार नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक : राज्यपाल

भोपाल, 2 अक्टूबर। गांधी भवन,भोपाल के मुख्य सभागार में आयोजित गांधी जयंती समारोह में प्रदेश के राज्यपाल माननीय मंगू भाई पटेल ने कहा कि महात्मा गांधी के विचार और आदर्श नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक हैं। उन्होंने युवाओं…

पंडित छन्नूलाल मिश्रा : ठुमरी और कजरी के लोक स्वर की विदाई

बनारस घराने की ठुमरी परंपरा के जीवंत स्तंभ और पद्मभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्रा का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके स्वर में ठुमरी, कजरी, चैती और दादरा का वह अद्वितीय संगम था जिसने शास्त्रीयता को लोकजीवन की…

हिंद स्वराज से जलवायु संकट तक : गांधी की चेतावनी और आज की दुनिया

महात्मा गांधी ने हिंद स्वराज में जिस ‘सभ्यता’ को हालात कहा था, वही आज के जलवायु संकट की जड़ बन चुकी है। बापू ने सौ साल पहले चेतावनी दी थी कि अगर दुनिया यूरोप-अमेरिका के उपभोगवादी रास्ते पर चली, तो…

सौ साल की सादगी, सेवा और संघर्ष का सफ़र – समाजवादियों के पितामह जी.जी. पारिख को अंतिम सलाम

मुंबई, 2 अक्‍टूबर। देश ने आज स्वतंत्रता संग्राम के उन अंतिम योद्धाओं में से एक को खो दिया। वरिष्ठ समाजवादी नेता, चिकित्सक, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. गुणवंतराय गणपतलाल राय पारिख, जिन्हें सब प्रेम से जी.जी. पारिख कहते थे, का…

गांधीजी का महात्मा प्रबंधकीय कौशल

प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों को गांधी के आंदोलनों, खासकर उनकी तैयारी के संदर्भ में देखें तो बहुत स्पष्ट रूप से उनका अमल दिखाई देता है। इस लिहाज से गांधी उस प्रबंधन के कारगर गुरु माने जा सकते हैं जिसे अनेक…