विचार

शिक्षा में 6% जीडीपी का निवेश अब भी अधूरा सपना- डॉ. वेदप्रकाश मिश्र

इंदौर, 14 मई । प्रसिद्ध शिक्षाविद डॉ. वेद प्रकाश मिश्र ने कहा है कि देश में 1952 में गठित पहले शिक्षा आयोग ने सिफारिश की थी कि कुल जीडीपी का कम से कम 6% हिस्सा शिक्षा पर खर्च किया जाए,…

खेल, सेलेब्रिटी और ब्रांड : कोहली और बदलती क्रिकेट संस्कृति

Virat Kohli के टेस्ट सन्यास ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज का क्रिकेट केवल खेल नहीं, एक बड़ा बाजार बन चुका है। फिटनेस, निरंतर प्रदर्शन और जुनून के प्रतीक कोहली, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में नई जान फूंकी, अब…

विकसित भारत के लिए तकनीक, शिक्षा और मूल्य जरूरी: डॉ. अनिल काकोडकर

दूसरे को कॉपी करके हम विकसित भारत नहीं बना सकते इंदौर,13 मई। भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष पद्म भूषण डॉ. अनिल काकोडकर ने कहा है कि दूसरे को कॉपी करके हम भारत को विकसित भारत नहीं बना सकते। देश…

शहरों की यातायात समस्या का हल है एलिवेटेड रोड और मल्टीलेवल पार्किंग

अभ्यास मंडल व्याख्यानमाला में बोले यूपी के सेवानिवृत्त आईएएस अवनीश अवस्थी इंदौर, 12 मई। उत्तर प्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा है कि देश के शहरों में बढ़ रही यातायात…

30 साल बाद महिला सेनाध्यक्ष देखने का सपना होगा साकार, सेना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाकर 25 फीसदी करने की जरूरत

अभ्‍यास मंडल व्‍याख्‍यानमाला में भारतीय वायु सेवा की सेवानिवृत्त विंग कमांडर अनुमा आचार्य का व्‍याख्‍यान इंदौर, 11 मई। भारतीय वायु सेवा की सेवानिवृत्त विंग कमांडर अनुमा आचार्य ने कहा है कि 30 साल बाद हमारे देश में तीनों सेना में…

दिलों को बांटता ‘द्वि-राष्ट्र सिद्धांत’

कहा जाता है कि हर देश की एक सेना होती है, लेकिन पाकिस्तान में सेना का एक देश है। दो टुकडों में विभाजित और कई अन्य टुकडों में विभाजन के लिए तैयार उसी पाकिस्तान की सेना के मुखिया जनरल सैयद…

आतंकवाद को अलविदा का वक्त आ गया

पहलगाम की विभीषिका ने देश को एकजुट किया—यह सिर्फ एक आतंकी हमला नहीं था, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का क्षण बन गया। पहली बार कश्मीर से लेकर दिल्ली तक, मस्जिद से लेकर संसद तक, एक सुर…

इतना सन्नाटा क्यों है?

कुमार प्रशांत का सवाल : लोकतंत्र में बोलने की जरूरत जयंत सिंह तोमर कुमार प्रशांत ने अपने भाषण के ठीक बीच में अचानक सवाल उछाला – ‘इतना सन्नाटा क्यों है? जो जहां हैं वहां से बोलिये। आज के लोकतंत्र की…

आतंकवाद के खिलाफ साझा स्वर : जब देश एकजुट होता है, तो राजनीति क्यों बांटती है?

पहलगाम में 26 निर्दोषों की हत्या से उपजा शोक पूरे भारत को हिला गया, लेकिन इस गहरे दुःख में भी एक नई चेतना दिखाई दी—धर्म, भाषा और क्षेत्र की सीमाओं को पार कर आम हिंदू और मुसलमान आतंकवाद के खिलाफ…

डॉ. अंबेडकर : संवाद के पक्षधर, द्वंद्व के विरोधी

भारतीय संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर संसद में जो दृश्य सामने आए, वे डॉ. भीमराव अंबेडकर की आत्मा को व्यथित कर सकते हैं। संविधान निर्माता को हथियार बनाकर की जा रही राजनीति न केवल लोकतंत्र की मूल आत्मा के विपरीत…