विचार

अयोध्या के अध्याय की पूर्णाहुति ! अब आगे क्या ?

इस सवाल से कैसे मुक्त हुआ जा सकता है कि लाखों की संख्या वाले साधु-संत, उनके करोड़ों शिष्य और भक्तों के साथ वे अनगिनत कार्यकर्ता जो मंदिर-निर्माण के कार्य को अपने संकल्पों की प्रतिष्ठा मानते हुए इतने वर्षों से लगातार…

परमाणु बम : आत्म-रक्षण का नहीं विनाश का अस्त्र है

6 अगस्त 2020 ‘हिरोशिमा दिवस’  : तबाही के 75 साल युद्ध, और वह भी परमाणु युद्ध की मार्फत अपने तमाम अडौसी-पडौसियों को सीधा कर देने के लिए बावले होते आज के कथित ‘देशभक्‍तों’ को 75 साल पहले जापान के हिरोशिमा (6अगस्‍त)…

मंदिर निर्माण का श्रेय इतिहास में किसके नाम दर्ज होगा ?

क्या कारण हो सकता है कि आडवाणी और तमाम नेता उस श्रेय को लेने से इनकार कर रहे हैं जिसके वे पूरी तरह से हक़दार हैं ? क्या ऐसा मान लिया जाए कि बाबरी का विध्वंस एक अलग घटना थी…

छ: सौ अरब बनाम पांच रूपये रोज के मायने

आंकडों का मायाजाल बहुत भयावह होता है। जैसे यह डेढ़ सौ रूपये की राहत सामग्री के आंकडों की घोषणा में कहा गया अस्सी करोड़ विपन्न लोगों को जुलाई से नवम्बर याने पांच माह तक राशन देने पर एक सौ बीस…

ग्राहकों का बैंकों के प्रति टूटता भरोसा

बैंकों ने अपने सेवा शुल्क बढ़ा दिये हैं जिससे न केवल बैंकों के साथ उनके ग्राहकों के संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है बल्कि बैंकिंग प्रणाली के प्रति उनका भरोसा भी धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। अब बैंक न…

जहरीली ‘जीएम’ फसलों पर जरूरी है, नियंत्रण

आजकल कैंसर और उस जैसी अनेक गंभीर बीमारियों के विस्‍फोट ने हमारे खान-पान पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी दौर में पता चल रहा है कि पूंजी की अपनी हवस में पागल हो रही बहुराष्‍ट्रीय कंपनियों ने ‘जीनेटिकली…

राजनीति के रहनुमा और राजनीतिक कुकर्म

राजस्‍थान की मौजूदा राजनीतिक उठापटक से और कुछ हो-न-हो, इतना पक्‍का है कि वहां के राजनेताओं को देशभर को हलाकान करने वाला कोरोना वायरस अस्तित्‍वहीन लगता है। गरीबी, भुखमरी और तिल-तिल कर मरता आम जीवन राजस्‍थान के राजनेताओं के लिए…

जनता की अदालत में देश की विधायिका

इन दिनों राजस्‍थान में और उसके पहले मध्‍यप्रदेश समेत अनेक राज्‍यों में लोकतंत्र का जो मखौल उडाया जा रहा है उसमें कौन हस्‍तक्षेप करके उसे पटरी पर ला सकता है? विधायिका की गफलतों पर अंकुश लगाने के लिए संविधान में…

‘निजता’ पर भारी ‘जीवन’ का अधिकार

कोरोना वायरस से उपजी बीमारी ‘कोविड-19’ से निपटने के लिए सरकार ने ‘आरोग्य सेतु’ नामक ‘एप’ को ‘डाउनलोड’ करना अनिवार्य कर दिया है। इस ‘एप’ की मार्फत सरकार चाहे तो किसी की भी नितांत निजी जिन्‍दगी में झांक सकती है,…

पुलिसिया दमन के पीछे है, दलितों का दोयम दर्जा

पिछले दिनों मध्‍यप्रदेश के एक गांव में खुल्‍लमखुल्‍ला पुलिस हिंसा की जो खबरें आई हैं उसने दलितों की बदहाली, पुलिस सुधार, जमीनों की नाप-जोख में वन और राजस्‍व विभागों की लापरवाही, वनाधिकार कानून जैसे कई सवालों को खडा कर दिया…