विचार

मोदी को सत्ता में बनाए रखना राष्ट्रीय जरूरत है !

इस कठिन समय में इस्तीफ़े की मांग करने की बजाय देश का नेतृत्व करते रहने के लिए प्रधानमंत्री को इसलिए भी बाध्य किया जाना चाहिए कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी अपने स्थान पर किसी और विकल्प की स्थापना के लिए…

अखिल गोगोई की जीत से असम में नई राजनीति का दौर

अखिल गोगोई असम में भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट के तौर पर जाने जाते हैं। उनकी पहचान बड़े बांधों का विरोध करने वाले, जैव विविधता को बचाने के लिए संघर्ष करने वाले, जैव विविधता पार्क बनाने वाले…

कोराना काल : पूंजीवाद में कोराना

कोविड-19 के इस मारक दौर में दवाओं, अस्पतालों, प्राणवायु और उसके सिलिन्डरों की भारी कमी है और उनकी कालाबाजारी तक हो रही है। क्या इसका बाजार की हमारी उस मौजूदा व्यवस्था से भी कुछ लेना-देना है जिसने नब्बे के दशक…

जनादेश ममता के पक्ष में नहीं, प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ है

दुनिया भर की नज़रें यह देखने के लिए अब भारत पर और ज़्यादा टिक जाएँगी कि अपने जीवन में किसी भी तरह की पराजय स्वीकार नहीं करने वाले नरेंद्र मोदी बंगाल के सदमे को किस अन्दाज़ में प्रदर्शित करते हैं…

प्रधानमंत्री के अंदर भी झांकने की जरूरत है !

देश और दुनिया की बदलती हुई परिस्थितियों में नागरिकों के लिए अब ज़रूरी हो गया है कि वे अपने नायकों की राजनीतिक प्रतिबद्धताओं से अलग उनके/उनमें मानवीय गुणों और संवेदनाओं की तलाश भी करें। ऐसा इसलिए कि अब जो निश्चित…

श्रमिकों का सम्‍मान और सबके लिए एक न्यायपूर्ण भविष्य के निर्माण का वादा

1 मई / अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस कोविड-19 के दौर और एक मई का दिन यानी मजदूर दिवस, हमें इस बात का आईना दिखाता है कि कोविड महामारी के दौर में सबसे ज्यादा अन्याय जिसने सहा वह है हमारा मजदूर वर्ग।…

कोविड-19 : आपदा में गंवाया अवसर

साल-सवा साल के कोविड-19 के दौर ने हमें इतना तो बता ही दिया है कि किसी आपदा से निपट पाने में हम बेहद फिसड्डी हैं। लॉकडाउन, दवाओं, अस्पतालों, ऑक्सीजन आदि जीवन रक्षक जरूरतों की बदइंतजामी ने हजारों लोगों के जीवन…

हिंसा को हराने की तजबीज

पिछले करीब चालीस सालों से माना जाता रहा है कि नक्सली हिंसा देश की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती है। लेकिन उसे आज तक समाप्त नहीं किया जा सका है। आए दिन देश की सैनिक और असैनिक आबादी नक्सली मुठभेड़ के…

बताइए ! सबसे पहले किसे बचाया जाना चाहिए ?

व्यवस्था के प्रति लोगों का यकीन समाप्त होकर मौत के भय में बदलता जा रहा है। सबसे ज़्यादा दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तो तब होगी जब ज़िम्मेदार पदों पर बैठे हुए लोग सांत्वना के दो शब्द कहने के बजाय जनता में व्याप्त…

कितने बँटवारे और कितने पाकिस्तान बाक़ी हैं अभी ?

बंगाल चुनाव : त्‍वरित टिप्‍पणी चुनाव-परिणामों से उपजने वाली चिंता हक़ीक़त में तो यह होनी चाहिए कि क्या ममता के हार जाने की स्थिति में पहले नंदीग्राम और फिर बंगाल के दूसरे इलाक़ों में मिनी पाकिस्तान चिन्हित किए जाने लगेंगे?…