जल, जंगल, जमीन

पर्यावरण : लालच से नाता तोड़ो, प्रकृति से नाता जोड़ो

कहा जाता है कि हम एक ग्रह और सभ्यता की हैसियत से खुद को लगातार समाप्त करने में लगे हैं। यानि हम जानते-बूझते खुद को खत्म करने के सरंजाम जुटा रहे हैं। ऐसे में समूची कायनात को बचाने के लिए…

वन्‍य जीवन : जंगलराज में सभ्यता

पढे-लिखे आधुनिक समाज में जंगल को बर्बरता, असभ्यता और पिछडेपन का ऐसा प्रतीक माना जाता है जिसमें ‘सर्वाइवल ऑफ दि फिटेस्ट’ यानि ‘सक्षम की सत्ता’ ही एकमात्र जीवन-मंत्र है, लेकिन क्या सचमुच ऐसा ही है? जंगल को जानने-समझने वाले इसके…

झारखंड : खनिज की खातिर खत्म होती खेती

किसानों, आदिवासियों और खेती से जुडे अनेक लोगों के लिए आजकल विकास का मतलब उनके प्राकृतिक संसाधनों, खासकर जमीन की लूट हो गया है। आदिवासी राज्य झारखंड भी इससे अछूता नहीं है। झारखंड के एक इलाके में जमीन की मारामार…

मेधा पाटकर ने कहा ; प्रकृति और संस्कृति का संरक्षण करने हेतु संघर्ष जारी रहेगा

नर्मदापुरम के बांद्राभान में जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय का राष्ट्रीय सम्मेलन सम्‍पन्‍न बांद्राभान (होशंगाबाद, नर्मदापुरम), 2 अप्रैल। जल-जंगल और जमीन के ज्वलंत मुद्दें को लेकर जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) के बैनर तले नर्मदापुरम के बांद्राभान में आयोजित राष्ट्रीय…

जल, जंगल, जमीन, नदी, पहाड़ का संरक्षण करने हेतु मैदानी व कानूनी संघर्ष तेज करने की जरूरत – मेधा पाटकर

जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय  (एनएपीएम) का राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन बांद्राभान, 1 अप्रैल। जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) के बैनर तले बसेरा सभागार बांद्राभान (होशंगाबाद, नर्मदापुरम) मध्यप्रदेश में “नदियों को अविरल बहने दो, जल, जंगल, जमीन, विस्थापन, विकास,…

1 व 2 अप्रैल को होशंगाबाद में होगा NAPM जन आंदोलनों के राष्ट्रीय सम्मेलन में विकास की अवधारणा पर विमर्श

2 अप्रैल को होगी होशंगाबाद में जनसभा 1 अप्रैल, 2023। होशंगाबाद में नर्मदा किनारे 1 और 2 अप्रैल को बांद्रा धाम, नर्मदापुरम, होशंगाबाद में जन आंदोलनों के राष्ट्रीय सम्मेलन होने जा रहा है। सम्‍मेलन में देशभर से 10 राज्यों के…

‘‘पंच ज’’ के संरक्षण, संवर्धन और आजीविका पर सम्मेलन संपन्न

5 जून को भोपाल में प्रदेशव्यापी प्रदर्शन होगा भोपाल, 28 मार्च। एकता परिषद सहित विभिन्न जनसंगठनों ने आज भोपाल में ‘‘पंच ज’’-जल, जंगल, जमीन, जन और जानवर-के संरक्षण, संवर्धन और आजीविका विषय को लेकर प्रदेश भर के आदिवासियों के साथ…

पर्यावरण : Ground water भूजल को भूलने के भयावह नतीजे

जल संरक्षण-संवर्धन के भांति-भांति के तौर-तरीकों के बाद अंतत: हम भूजल की शरण में ही आते हैं, लेकिन उसके प्रति हमारा आम, दैनिक व्यवहार क्या है? क्या हमारे मौजूदा दुर्व्यवहार के चलते भूजल बच पाएगा? और क्या ऐसे में हम…

आज भी खरी है प्राचीन जल संस्कृति

World Water Day 2023 दुनिया की आबादी आठ अरब से अधिक हो चुकी है। इसमें से लगभग आधे लोगों को साल में कम से कम एक महीने पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ता है। जलवायु परिवर्तन के कारण…

बांध तो नहीं रुका, लेकिन क्या आंदोलन भी असफल रहा?

करीब चार दशकों के लंबे अनुभव में ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ को अपनी सफलता-असफलता के सवालों का सामना करते रहना पडा है। एक तरफ घाटी में प्रस्तावित बांध बनते रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ आंदोलन, अपनी स्थानीय, सीमित ताकत और प्रभाव…