Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

जल, जंगल, जमीन

जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार जीवनशैली

सब जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा त्रासदी की वजह धरती पर बसे इंसानों की हवस पर आधारित जीवन-पद्धति है, लेकिन कोई इसे रोकना, बदलना नहीं चाहता। वैश्विक स्तर पर भी ठीक यही हालत है और तरह-तरह के जमावडों…

Ujjain : सरकारी धतकरमों में उलझी प्रदूषित क्षिप्रा

अपने समाज और सरकार की बदहाली की एक बानगी उज्जैन की क्षिप्रा नदी में लगातार बनी रहने वाली गंदगी भी है, उस क्षिप्रा की जिसके तट पर हर 12 साल में हिन्दुओं का सबसे बड़ा मेला महाकुंभ लगता है। इसे…

अंतरराष्‍ट्रीय : पनामा में पर्यावरण के लिए प्रतिरोध

मौजूदा विकास की अवधारणा के चलते दुनियाभर में प्रतिरोध हो रहे हैं। हाल में मध्य अमेरिकी देश पनामा Panama में तांबे की खदान के विरोध में आम लोगों ने प्रदर्शन किया और सुप्रीम कोर्ट तथा राष्ट्रपति को अपनी बात समझा…

नागौर : मरुभूमि में तालाब

‘राजस्थान की रजत बूंदें’ सरीखी नायाब किताब लिखने वाले अनुपम मिश्र कहा करते थे कि जिस इलाके में प्रकृति ने पानी देने में थोड़ी कंजूसी की है, वहां समाज ने पानी की एक-एक बूंद को प्रसाद मानकर बेहद सलीके से…

सुरंग में मजदूरों का फंसना कोई अकेली त्रासदी नहीं है

28 नवंबर को करीब 17 दिन से बारामासी सड़क की निर्माणाधीन सुरंग में फंसे 41 मजदूरों का सुरक्षित बाहर निकलना कोई अकेली त्रासदी नहीं है। दुनियाभर के वैज्ञानिकों में ‘बच्चा पहाड़’ माने जाने वाले हिमालय में ऐसी त्रासदियां लगातार होती…

खेती से खत्म होता पानी : उरुग्वे का उदाहरण काफी है

इंसानी वजूद के लिए जरूरी हवा, पानी और भोजन की त्रयी में से पानी तेजी से विलुप्त होता जा रहा है। वजह है, नए आधुनिक तरीकों से होने वाली खेती और उद्योग। क्या होता है जब बुनियादी मानवीय जरूरतों को…

Tribal : जंगल बचा रहे अलीराजपुर के आदिवासी

आजादी के पचहत्तार साल में वन अधिकार पर अब जाकर कुछ बातें हो रही हैं और परंपरागत वनवासियों को कहीं-कहीं पट्टे दिए भी जा रहे हैं, लेकिन कुछ आदिवासी इलाके ऐसे हैं जहां जंगल को बचाने का विवेक और तकनीक…

पानी को सहेजने की परम्परा

इंसान के जिन्दा रहने के लिए हवा, पानी और भोजन अनंत बुनियादी जरूरतें हैं और इसीलिए आजकल के व्यापार-धंधे में इन जिन्सों की भारी पूछ-परख है। इन तीनों में से सिर्फ पानी को ही देखें तो क्या पता चलता है?…

ब्राजील से ”विश्व जल शांति अभियान” का आगाज : अहिंसामय समाज के निर्माण की पहल

मानवता पर आए संकट का समाधान अब प्राकृतिक सुरक्षा में ही है। आज का हमारा आर्थिक ढांचा बहुत विस्तार पा गया है। इससे जलवायु परिवर्तन के संकट ने चारों ओर असुरक्षा पैदा कर दी है। इस प्राकृतिक सुरक्षा कवच की…

बेरहमी से बर्बाद किया जाता हिमालय

इन दिनों हिमाचलप्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश जैसे देश के उत्तरी राज्यों में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। आम आबादी समेत वैज्ञानिक और राजनेता तक, सब जानते हैं कि इसकी बुनियादी वजह कथित विकास की खातिर अपेक्षाकृत नवजात पर्वत…