आदिवासियों पर हो रहे हमले के खिलाफ बड़वानी के हजारों आदिवासी हुए लामबंद
माधुरी कृष्णस्वामी पर जिला बदल की कार्रवाई अन्यायपूर्ण : नर्मदा बचाओ आंदोलन बडवानी, 20 जुलाई। बुधवार को बड़वानी में आदिवासियों के बीच कार्यरत जागृत आदिवासी दलित संगठन के नेतृत्व में हजारों आदिवासी महिला एवं पुरुषों ने संगठन सहयोगी सामाजिक कार्यकर्ता…
बाढ़ : विनाश के पीछे विकास की लालसा
वर्षा, अतिवृष्टि, नदी में उफान, नदी का अपने तट से बाहर निकलना, यह सब सामान्य प्राकृतिक घटनाएं हैं। हमें पानी के बहाव के साथ जीना सीखना होगा। बाढ़ से जुड़े ये दोनों झूठ एक बड़े सच को छुपाते हैं कि…
Water emergency जल-आपातकाल : Uruguay उरुग्वे में उलट रहा इतिहास
उपेन्द्र शंकर अपनी बेहतरीन फुटबॉल टीम के कारण दुनिया भर में पहचाना जाने वाला दक्षिण-अमेरिका का साढे चौंतीस लाख आबादी वाला छोटा सा देश Uruguay उरुग्वे अब पानी के भीषण संकट से दो -चार है। पानी की यह बदहाली उस…
केदारनाथ धाम : आपदा का एक दशक
एक दशक पहले केदारनाथ मंदिर के ऊपर से उठे बवंडर ने मंदिर समेत पूरी केदार-घाटी को तहस-नहस कर दिया था। जैसा कि होता है, दुर्घटना के प्रभाव में तरह-तरह के सुझाव-सलाहें भी आईं जिनका मूल स्वर तीर्थ-यात्राओं को पर्यटन बनाए…
वन संरक्षण अधिनियम में संशोधनों के विरोध में 30 जून को राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध का आह्वान
नईदिल्ली, 28 जून। देश के अलग-अलग राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा बड़े स्तर पर भूमि और वन हड़पने के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए बना एक सांझा मंच भूमि अधिकार आन्दोलन से जुड़े देश के 45 से अधिक संगठनों/ जनसंगठनों ने…
नर्मदा : बे-पानी बड़वानी के पडौस में सूखती नर्मदा
‘सरदार सरोवर’ निर्माण के दौरान जो सब्जबाग दिखाए गए थे उनमें पेयजल, सिंचाई और निस्तार के लिए भरपूर पानी का वायदा अव्वल था। आज करीब छह दशक बाद इस वायदे की हकीकत क्या है? सदानीरा नर्मदा के लगभग किनारे पर…
मालवा मिल और कल्याण मिल की जमीन को सीमेंट कांक्रीट का जंगल नहीं बनने देंगे
अभ्यास मंडल सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने परिचर्चा में की बेबाकी के साथ बात इंदौर, 19 जून। सरकार को मालवा मिल और कल्याण मिल की जो 92 एकड़ जमीन मिली है, उस पर किसी भी कीमत पर सीमेंट कांक्रीट का…
75 वर्ष में आबादी 4 गुना बढ़ी, लेकिन जल स्रोत की संख्या मात्र 4 लाख बढ़ी
धरातल और जल आंदोलन विषय पर पर्यावरणविद डॉ. क्षिप्रा माथुर का व्याख्यान इंदौर, 7 जून। भारत में केवल आर्थिक असमानताएं ही नहीं है जल वितरण को लेकर भी बहुत सारी असमानताएं है। एक तरफ ग्रामीण महिलाएं रोजाना 4 किलोमीटर दूर पैदल…
पर्यावरण बिगड़ने के दुष्प्रभाव से चिंतित विश्व
जलवायु परिवर्तन के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता रहेगा और बढ़ते तापमान से सूखे की स्थिति पैदा होगी। जिससे मीठे पानी के महत्वपूर्ण स्रोत प्रभावित होंगे। संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम (यूएनईपी) का मानना है कि पानी के बाद रेत सबसे…









