स्‍वास्‍थ्‍य

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती की बात नहीं करता मध्‍यप्रदेश का बजट

इंदौर/भोपाल 2 मार्च। वर्तमान राज्‍य सरकार का आखरी बजट पर प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुए जन स्वास्थ्य अभियान,मध्यप्रदेश ने सरकार से मांग की है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बजट आवंटन में पर्याप्त वृद्धि की जाए और…

स्वास्थ्य अधिकार कानून; राजस्‍थान विधानसभा सत्र में पारित किये जाने की मांग

जयपुर । लम्बे समय से राजस्थान सरकार स्वास्थ्य अधिकार कानून बनाने में अटकी हुई है। निजी अस्पतालों अपने आप को किसी भी कानून से मुक्त होकर किसी भी प्रकार के रेगुलेशन से मुक्त होकर कार्य करना चाह रही है। अब…

केंद्रीय स्वास्थ्य बजट 2023-24 में फिर की गई आवंटन में कमी

केंद्रीय स्वास्थ्य बजट 2023-24 पर जन स्वास्थ्य अभियान (JSA) का वक्तव्य नईदिल्‍ली, 3 फरवरी। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्‍तुत किये गए वर्ष 2023-24 के बजट पर जन स्वास्थ्य अभियान (JSA), जो कि स्वास्थ्य अधिकारों के लिए काम करने…

Health : मधुमेह – कोविड की विरासत

दुनियाभर में कमोबेश माना जाने लगा है कि या तो कोविड-19 लगभग समाप्त हो गया है या फिर हम उसके साथ जीने के लिए तैयार हो गए हैं, लेकिन हाल के कुछ शोध बता रहे हैं कि कोविड ने एक…

भोपाल गैस त्रासदी : ज़ख्म अभी भरे नहीं हैं !

‘भोपाल गैस त्रासदी’ के 38 वें साल में, उसके प्रति सरकारों, सेठों और समाज की बेशर्म अनदेखी के अलावा हमें और क्या दिखाई देता है? 1984 की तीन दिसंबर के बाद पैदा हुई पीढी इसे लेकर क्या सोचती है? क्या…

गैस पीड़ितों के विशिष्ट इलाज में विफल भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र (BMHRC)

एक दशक पहले तक जिस भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर के सुपर स्पेशिऐलटि अस्पताल के रूप में थी जहाँ बारह से ज्यादा उच्चत्तर चिकित्सा विभागों में कंसल्टेंट कार्यरत रहते थे और आठ बाह्य चिकित्सा यूनिट्स…

प्रकृति : जिन्दा रहने की जद्दोजेहद

अब यह कोई दुराव-छिपाव की बात नहीं रही है कि हमारे आम-फहम जीवन में लगातार गिरावट आती जा रही है और इसकी वजह भी हम खुद ही हैं। आखिर किस तरह हम अपनी इस बदहाली से पार पा सकते हैं?…

अवसाद की असलियत : समझ कम, सुविधाएं नाकाफी

वैसे हमारे समाज में अवसाद कोई संकट नहीं माना जाता, लेकिन अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढती आत्महत्याओं ने इस मान्यता को खारिज कर दिया है। महाराष्ट्र, मध्‍यप्रदेश, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, यहां तक कि पंजाब सरीखे ‘हरित-क्रांति’ वाले राज्यों…

उदास समाज के लिए कम ही सही, हँसी तो जरुरी है

हंसने के प्रति आप गंभीर नहीं तो जान लें कि आम तौर पर 23 साल की उम्र के आस पास लोगों का हास्य बोध घटने लगता है| मांसपेशियों के कमज़ोर होने और आखों की रोशनी के घटने से भी ज्यादा…