‘कोविड-19’ के काम में सरकारी, गैर-सरकारी सुविधाएं
सुरभि अग्रवाल, शोभा शुक्ल, बॉबी रमाकांत व संदीप पाण्डेय कोरोना वायरस से उपजी ‘कोविड-19’ बीमारी ने बेहद छोटे, करीब तीन महीने के अंतराल में कई तरह के गुल खिलाए हैं। सरकारी लापरवाही, अक्षमता और टालू प्रवृत्ति उन कईयों में से…
वैक्सीन के निर्माण में जरूरी है आत्म-निर्भरता
‘कोविड-19’ के इलाज के लिए वैक्सीन यानि ‘टीका’ की अहमियत उजागर हुई है, लेकिन क्या विशाल पैमाने पर इसका निर्माण आसान होगा? वे कंपनियां जो धंधे की खातिर झूठे आंकडों से बीमारी की गंभीरता स्थापित करने से लगाकर खुद बीमारी…
कोरोना संकट पर सामान्य ज्ञान
कोरोना वायरस ने इन दिनों दुनियाभर में खलबली मचा दी है। अमीर-गरीब, ऊंचा-नीचा, काला-गोरा, गरज कि हर नस्ल और फितरत के इंसान को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है। इससे कैसे निपटा जाए? यह सभी को बार-बार बताया…
पत्थरों की रिसती धूल से साँसों में जमती मौत
सिलिकोसिस एक लाईलाज बीमारी है और जब एक बार व्यक्ति का प्रमाणीकरण हो गया है कि वह सिलिकोसिस का ही मरीज है, तो फिर इसके क्या मायने हैं ? राज्य सरकार व्दारा अभी किये जा रहे सारे जतन केवल फटे…
जरूरत है गरीबजनों के लिए सस्ती दवाईयों की
बाजार प्रोत्साहन में अरुचि के परिणाम स्वरूप बीमारियों के अनुसंधान में भारी कमी और असमानता है, जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा समाज की उपेक्षित आबादी को ही उठाना पड़ता है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक और संयुक्त राष्ट्र…
कैसे बसेंगे, लौटते प्रवासियों के गांव
‘कोविड-19’ के कारण लगे ‘लॉक डाउन’ का सर्वाधिक व्यापक और गंभीर असर उन मजदूरों पर पडा है जो गांवों की अपनी दुनिया छोडकर रोजी-रोटी की खातिर शहरों में बसे थे और अब वापस गांवों की ओर भागे जा रहे हैं।…
‘कोविड-19’ में एकांगी अध्यात्म
कोविड-19 के कारण लगे ‘लॉक डाउन’ ने हमारे ‘वस्तुओं’ के भौतिक संसार की अपर्याप्तता के साथ-साथ आंतरिक, आध्यात्मिक संसार के सतहीपन की पोल भी खोल दी है। ऐसे में कई आध्यात्मिक कहे जाने वाले लोग अवसाद, डर और दुख को…
कुछ जरूरी भी सिखा-समझा रहा है, कोरोना
‘लॉक डाउन’ को देर-सबेर निपट जाने वाला संकट न मानते हुए इस दौर में कुछ अच्छी आदतें सीख लेना यूं तो कोई बुरा भी नहीं है, लेकिन रोजमर्रा की आम-फहम आदतों की तब्दीली कई बुनियादी सवालों की तरफ इशारा करती…
गांधी दर्शन दिखाता है, कोरोना संकट में रास्ता
गांधी जी की 150 वीं जन्मशती मनाते देश में श्रमिक, कारीगर, किसान और न जाने कितने लोग ठगे से अपने घरों और गांवों की ओर भागते नजर आ रहे हैं। आज हमारे बीच गांधीजी तो नहीं हैं, किन्तु गांधी विचारों…
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तरफ लौटने का वक्त
सुरेंद्रसिंह शेखावत कोविड-19 से बचने के लिए लगाए गए ‘लॉक डाउन’ के तीसरे चरण में यह सवाल उठना लाजिमी है कि अब कोरोना के बाद क्या? आजादी के सत्तर सालों में हमने उद्योग, शहरीकरण और मशीनीकरण का उपयोग करके देख…









