गांधी दर्शन और विचार

किसानों के लिए गांधी की तजबीज

केन्‍द्र सरकार द्वारा बनाए गए दो कानूनों और एक संशोधन के विरोध में इन दिनों देशभर में किसानों ने आंदोलन खडे कर रखे हैं। इन आंदोलन की बुनियादी मांगों के साथ गांधी की तजबीज भी जुड जाए तो कैसा हो?…

क्या कोई सचमुच सुनता है, गांधी को?

आज की राजनीतिक जमातों, उनकी उठा-पटक और सत्‍ता पर चढने-उतरने की उनकी कवायद के बरक्‍स गांधी को रखकर देखें तो क्‍या नतीजे निकलते हैं? क्‍या गांधी ने इस तरह की राजनीतिक विरासत की कल्‍पना भी की थी? हाल में किसानों…

खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

महात्‍मा गांधी : 150वां जयंती वर्ष   गांधी की ज़रूरत के प्रति एक ईमानदार अभिव्यक्ति की पहली शर्त ही यही है कि हम इन हिंसक आत्मघाती दस्तों का अहिंसक और शांतिपूर्ण तरीक़ों से प्रतिकार करने के लिए अपने शरीरों के…

विन्सेंट शीनः जिसने कहा था कि गांधी कभी भी मारे जा सकते हैं

विन्सेंट शीन लिखते हैं कि गांधी ने पूरी दुनिया की आत्म का छू लिया था। गांधी पर 1927 में रेने फुलम मिलर ने एक किताब लिखी। उसका शीर्षक था- लेनिन एंड गांधी। लेकिन तब तक गांधी को गंभीरता से नहीं…

गांधी महज सिद्धांत नहीं, व्यवहार हैं

2 अक्‍टूबर : गांधी जयंती पर विशेष आज के समय में सर्वाधिक उपयुक्‍त,सक्षम और सर्वजन-हिताय विचार महात्‍मा गांधी की कथनी और करनी से लिए जा सकते हैं। गांधी के विचार केवल भारत या भारतीय उपमहाद्वीप भर के लिए नहीं हैं,…

गुम होता गांधीजी का ‘जंतर’

महात्‍मा गांधी के समूचे जीवन को देखें तो उस पर एक ‘जंतर’ का प्रभाव साफ दिखाई पडता है। सबसे गरीब और कमजोर आदमी को ध्‍यान में रखकर अपने कामकाज और भविष्‍य को तय करने के इस ‘जंतर’ ने गांधीजी के…

हर दिन नयी ज़मीन, हर दिन नया आसमान

11 सितंबर विनोबा भावे की 125 वां जयन्ती वर्ष महात्‍मा गांधी के आध्यात्मिक अनुयायी माने जाने वाले विनोबा अपने विचारों और उन विचारों के क्रियान्‍वयन में अनूठे थे। विडम्बना यह है कि सन्त, महात्‍मा और ईश्‍वर के दर्जे पर रखने…

मैक्सिको को गांधी चाहिए

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा दीवार खड़ी करके अमरीकी सीमाओं को ‘सील’ करने की हरकत के चलते आजकल बीच बहस में खड़ा मध्य-अमेरिकी देश मैक्सिको आखिर किन संकटों से गुजर रहा है ? क्या वहां गांधी के अहिंसक औजार कारगर…

डाकुओं से मुक्त चंबल-घाटी को पछाड़ रहे हैं, बीहड़

एक जमाने में दुर्दान्त डाकुओं की शरण-स्थली की तरह ख्यात चंबल-घाटी की सम्पन्नता में बरसों पुरानी बीहडों की समस्या आडे़ आती रही है। इससे निपटने के लिए हवाई जहाजों से बीजों के छिड़काव से लगाकर भूमि-समतलीकरण तक सभी तरह के…

स्वराज नहीं है, अंग्रेजी राज की समाप्ति

अगस्‍त ’47 में मिली आजादी ने क्‍या सचमुच हमें आजाद कर दिया था? क्‍या हम अपनी जरूरतों, संसाधनों और क्षमताओं के हिसाब से अपना विकास कर पाने के लिए स्‍वतंत्र हुए थे? और यदि यह हुआ था तो फिर हमारी…