गांधी दर्शन और विचार

भारत-छोड़ो आंदोलन : 9 अगस्त 42 को शुरू हई जनक्रांति ने देश को आज़ादी दिलाई

अगस्त क्रांति दिवस की 79वीं वर्षगांठ 9 अगस्त, 2021 अगस्त क्रांति दिवस की 79वीं वर्षगांठ है। ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष के इतिहास में यह आंदोलन एक प्रमुख मील का पत्थर है। जब महात्मा गांधी ने…

क्यूबा : मजबूरी में भी कारगर, महात्मा गांधी

सर्वशक्तिमान अमरीका की एन नाक के नीचे बैठकर उसकी खामियों पर उंगली रखने वाले तीसरी दुनिया के देश क्यूबा को आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंधों के रूप में उसका खामियाजा भुगतना पडा है, लेकिन क्यूबा ने इस आपदा को अवसर में…

विशेष : गांधीजी के आर्थिक विचारों की अहमियत

आज के समय में अर्थ-व्यवस्था को लेकर दिए गए गांधीजी के विचारों की प्रासंगिकता उजागर होने लगी है। अनेक राष्ट्र-प्रमुखों से लगाकर चोटी के अर्थशास्त्रियों तक कई लोग हैं जिन्हें गांधी के आर्थिक विचारों पर भरोसा होने लगा है। इस…

महात्मा गांधी : संत की छवि में सिनेमाई किरदार

महात्मा गांधी का जीवन उनकी मृत्यु के बाद से ही फिल्मकारों की पसंद का ‘विषय’ रहा है। अनेक ख्यात फिल्मकारों ने गांधी के घटना-प्रधान जीवन पर अपने-अपने लहजे में फिल्में रची हैं। गांधी जैसी महान शख्सियत को किसी भी विशेषण…

महात्‍मा को मैदान में उतारने वाले – विनोबा

ध्‍यान से देखें तो आजादी के बाद से ही गांधी और उनके बाद विनोबा ने लगातार हमारे विकास की बातें की हैं। ये बातें सम-सामयिक सत्‍ता-प्रतिष्‍ठानों को कभी नहीं सुहाई और नतीजे में अब हम विकास को विनाश की संज्ञा…

किसान के लिए भी है, ‘गांधी का ताबीज’

आजकल किसानों और किसानी से जुडे लोगों के बीच भारी बेचैनी दिखाई दे रही है। हाल में केन्‍द्र सरकार द्वारा संसद में पारित करवाए गए तीन कानूनों को लेकर देशभर में धरना, प्रदर्शन, चक्‍काजाम और रैलियां जारी हैं। क्‍या किसानी…

कृषि के ताजा कानूनों पर क्‍या कहते, गांधी

इन दिनों देशभर के किसान संसद द्वारा पारित तीन कानूनों को लेकर बेचैन हैं। इन कानूनों के विरोध में जगह-जगह धरना, प्रदर्शन जारी हैं और इनकी मार्फत सरकार से कहा जा रहा है कि वह इन कानूनों को वापस ले…

किसानों के लिए गांधी की तजबीज

केन्‍द्र सरकार द्वारा बनाए गए दो कानूनों और एक संशोधन के विरोध में इन दिनों देशभर में किसानों ने आंदोलन खडे कर रखे हैं। इन आंदोलन की बुनियादी मांगों के साथ गांधी की तजबीज भी जुड जाए तो कैसा हो?…

क्या कोई सचमुच सुनता है, गांधी को?

आज की राजनीतिक जमातों, उनकी उठा-पटक और सत्‍ता पर चढने-उतरने की उनकी कवायद के बरक्‍स गांधी को रखकर देखें तो क्‍या नतीजे निकलते हैं? क्‍या गांधी ने इस तरह की राजनीतिक विरासत की कल्‍पना भी की थी? हाल में किसानों…

खोट गांधी की प्रासंगिकता में नहीं, हमारे साहस में है !

महात्‍मा गांधी : 150वां जयंती वर्ष   गांधी की ज़रूरत के प्रति एक ईमानदार अभिव्यक्ति की पहली शर्त ही यही है कि हम इन हिंसक आत्मघाती दस्तों का अहिंसक और शांतिपूर्ण तरीक़ों से प्रतिकार करने के लिए अपने शरीरों के…