विकास के नाम पर की जा रही बेशर्मी की एक बानगी बिहार के भागलपुर के पीरपैंती में देखी जा सकती है जहां अडानी कंपनी को ‘अल्ट्रा-सुपर क्रिटिकल थर्मल-पावर परियोजना’ खड़ी करने के लिए केवल एक रुपया प्रति एकड़ किराए की…
हमारे समय की विकास योजनाओं की त्रासदी है कि वे आस-पड़ौस के संसाधनों और समाज को तरजीह दिए बिना खड़ी की जाती हैं। ‘स्मार्ट सिटी मिशन’ भी इससे हटकर नहीं है। करीब दस साल पहले बड़े धूम-धडाकों के साथ उतारी…
‘नमस्ते ट्रंप,’ ‘अबकी बार, ट्रंप सरकार’ और ‘माई फ्रेंड डोनॉल्ड’ की गलबहियों से छिटककर ‘लाल आंखें’ दिखाने वाले चीन और रूस की चापलूसी आखिर उसी अर्थ-नीति की देन है जो हमारे आम, गरीब-गुरबों को आए दिन रुलाती रहती है। क्या…
राजेन्द्र जोशी चार दशकों के ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की वर्षगांठ पर यह जानना बेहद रोचक हो सकता है आखिर इस लंबे संघर्ष कि शुरुआत कैसे हुई थी? कौन लोग थे जिन्हें पानी और उसके लिए बांधों की जरूरत के उस…
जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं अब सिर्फ पर्यावरणीय नहीं, बल्कि मानवीय संकट बन चुकी हैं। पिछले एक दशक में दुनिया भर में करोड़ों लोग बाढ़, सूखा, तूफान और समुद्र स्तर बढ़ने के कारण अपने घरों से उजड़ चुके हैं। विशेष…
सब जानते हैं कि आधुनिक विकास की बुनियाद प्रकृति-पर्यावरण, खासकर नदियों को क्रूरता से नष्ट करने पर टिकी है। यह भी सभी जानते-भुगतते हैं कि प्रकृति-पर्यावरण और नदियों की बर्बादी इंसानों को समाप्त कर सकती है, लेकिन इसे कोई बदलना…
कई बार सरकारें भी जनहित में कारगर फैसले ले लेती हैं। हाल में बैलों की खेती को प्रोत्साहन देने का राजस्थान सरकार का फैसला इसी तरह का है। ध्यान से देखें तो बैलों से की जाने वाली खेती का अर्थशास्त्र…
भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले पहाड़ों में विकास योजनाओं की जिद ने जानलेवा आफतें खड़ी की हैं। नतीजे में पहाड़ और उन पर बसा जीवन लगातार आपदाओं की चपेट में बना रहता है। कमाल यह है कि…
नई सरकार के गठन की आपाधापी में राजधानी दिल्ली समेत देश के अनके इलाके अपने जल संकट और उबलती गर्मी की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं खींच पाए। दिनों-दिन गहराते ये संकट क्या केवल राजनीतिक खींचतान की वजह से ही हैं?…
चिंतन सम्मेलन में देश भर से जुटे दो सौ से ज्यादा चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता देश के आम लोगों को अब जगाने की ज्यादा जरूरत है क्योंकि सभी प्राकृतिक संसाधनों पर पूंजीपतियों का कब्जा हो रहा है। सरकारें तमाशबीन बनी…