निमिषा सिंह देश की आबादी में अनुसूचित जनजाति के लोगों की तादाद 8.6% है, लेकिन विकास परियोजनाओं के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की कुल संख्या में अनुसूचित जनजाति के लोगों की तादाद 40 प्रतिशत है। जाहिर है, जनजातीय लोगों को जो भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची से आच्छादित हैं, भूमि-अधिग्रहण, विस्थापन…
सर्वोदय त्याग और सृजन का इतिहास है – चंदन पाल भुवनेश्वर, 17 नवंबर। महात्मा गांधी के सर्वोदय विचार और स्वतंत्रता के बाद समानता व समृद्धि के साथ एक नए भारत के निर्माण की परंपरा को याद करते हुए, ओडिशा में…
जम्मू-कश्मीर और समूचे हिमालयी क्षेत्र में लोकतांत्रिक अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण की रक्षा हो 16 नवंबर, 2024 । 260 से अधिक सामाजिक और पर्यावरणीय कार्यकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर में छह कार्यकर्ताओं की जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत गिरफ्तारी का विरोध…
एल.एस. हरदेनिया 1960 के दशक में दक्षिण एशिया में एक साधारण नमक, शक्कर और साफ पानी के मिश्रण से हैजा और अन्य दस्त जनित बीमारियों को नियंत्रित करने का तरीका विकसित करने वाले स्वास्थ्य विशेषज्ञ रिचर्ड ए. कैश का पिछले…
जयप्रकाश नारायण क्या वर्तमान दलीय लोकतंत्र का कोई विकल्प हो सकता है? और यदि हो सकता है तो उसका स्वरूप कैसा होगा? इस सिलसिले में प्रस्तुत है, ‘सप्रेस’ के भंडार में से देश के मूर्धन्य नेता, स्वतंत्रता-संग्राम सेनानी स्व. श्री…
आम लोगों से भिन्न गांधीजी का पहनना-ओढ़ना भी एक व्यापक राजनीतिक-सामाजिक कार्रवाई का हिस्सा होता था। दक्षिण भारत की यात्रा के दौरान पारंपरिक काठियावाडी वस्त्रों को छोड़कर लंगोट धारण करना उनकी ऐसी ही एक पहल थी। कैसे हुआ,यह बदलाव? गांधीजी…
आचार्य विनोबा भावे गांधी को समझने के लिए विनोबा से बेहतर कौन हो सकता है? जिन्हें खुद गांधी ने ‘पहला सत्याग्रही’ माना हो, वे गांधी को दैवीय महापुरुष की बजाए एक इंसान मानते थे। ‘सप्रेस’ के दस्तावेजों में 1973 में…
एल.एस. हरदेनिया भाषा की ताकत कितनी होती है। यदि उसका समर्थन होता है तो वह भी अद्भुत और यदि इसका विरोध होता है तो भी अद्भुत। हमारे साथ-साथ चीन में भी आज़ादी आई, परंतु वहां के नेतृत्व ने एक विशेष भाषा…
11 सितंबर : विनोबा भावे जयंती महात्मा गांधी की आध्यात्मिक, रचनात्मक विरासत सम्भालने वाले विनोबा भावे ने गांधी के जाने के बाद सेवाग्राम (वर्धा) में पूर्व-निर्धारित रचनात्मक कार्यकर्ताओं की राष्ट्रीय बैठक में तो अधिक कुछ नहीं कहा, लेकिन बाद में…
126 वां जयंती वर्ष : दादा धर्माधिकारी मनुष्य एक-दूसरे के समीप होते हुए भी एक-दूसरे के साथ जीते नहीं हैं। इसमें चन्द बाधाएं हैं। एक है – मालिकी और मिल्कियत। दूसरा है – संप्रदाय या धर्म। तीसरा – जाति। चौथा…