पुलवामा के सवाल अनुत्तरित हैं ! बैसरन के जवाब मिलेंगे क्या ?
बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हुआ आतंकी हमला देश को झकझोर गया है। सरकार ग़ुस्से में है और कड़ी कार्रवाई के संकेत दे रही है। हमले में 26 लोगों की जान गई। जवाबी कार्रवाई की बातों के बीच सवाल यह…
विनोद कुमार शुक्ल : ‘इतनी उदासीनता कहाँ से आती है ?’
ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल के साहित्य में सामाजिक-राजनीतिक संघर्षों की अनुपस्थिति को लेकर बहस छिड़ी है। यह बहस साहित्यकार की सामाजिक जिम्मेदारी और उसकी व्यक्तिगत रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन का सवाल उठाती है। सवाल है क्या हर…
Sunita Williams Return : किसी चमत्कार से कम नहीं है अंतरिक्ष से धरती पर यह वापसी !
अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 286 दिनों बाद धरती पर लौट आई हैं। वे केवल आठ दिनों के लिए अंतरिक्ष गई थीं, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण उनकी वापसी टलती रही। उनकी सुरक्षित वापसी ने दुनिया को राहत की सांस लेने…
बर्लिन से ज़्यादा ऊंची नफ़रत की दीवारों पर ख़ामोश हैं सत्ता प्रतिष्ठान ?
आज़ादी के बाद (या शायद पहले भी) कभी ऐसा नहीं हुआ होगा कि मस्जिदों को तिरपालों से ढाका गया हो या नमाज़ों का वक्त बदला गया हो । मुस्लिमों से कहा गया कि वे घरों के भीतर रहते हुए चल…
कब तक कहते रहेंगे कि कोई डर नहीं लग रहा ?
चारों तरफ़ भय और आतंक का माहौल है। नई-नई सत्ताएँ आए दिन प्रकट हो रही हैं जो नागरिकों को डरा रही हैं। सत्ता प्रतिष्ठान या तो नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करने में निकम्मा साबित हो रहा है या फिर अपराधी…
इंदिरा की नज़रों में जेपी की हैसियत आम आदमी जितनी ही थी ?
लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) : 11 अक्टूबर जन्मदिन लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) का आज (ग्यारह अक्टूबर) जन्मदिन है। तीन दिन पहले आठ अक्टूबर को उनकी पुण्य तिथि थी। सोचा जा सकता है कि जेपी आज अगर हमारे बीच होते तो…
गांधी का ‘डांडी मार्च‘ ‘डंडा मार्च’ में बदल दिया गया है !
प्रसंग : गांधी जयंती अलग-अलग दलों और धड़ों में बँटा देश का राजनीतिक नेतृत्व गांधी और उनके विचारों को काफ़ी पीछे छोड़ चुका है। उसके लिए ज़रूरत सिर्फ़ गांधी के आश्रमों (सेवाग्राम और साबरमती) के आधुनिकीकरण या उन्हें भी ‘सेंट्रल…
क्रिएटर ने एक बहुत हसीन चीज बनाई है औरत : एम एफ़ हुसैन
जन्मदिन पर याद : बातचीत (समापन किश्त) भगवान विट्ठल(कृष्ण)और रुक्मिणी के पवित्र तीर्थस्थल पंढरपुर ( जिसे दक्षिण काशी भी कहते हैं) में 1915 में जन्म लेकर ईसाइयों के मुल्क इंग्लैंड के शहर लंदन में अंतिम सांस लेने वाले हुसैन साहब…
भारत के कल्चर का एसेंस है सेलिब्रेशन : एम एफ़ हुसैन
जन्मदिन पर याद : बातचीत भाग -2 हुसैन साहब से जब बात करते हैं तो वे लगने ही नहीं देते हैं कि आप दुनिया के किसी बहुत बड़े पेंटर से मुखातिब हैं ! ऐसा महसूस कराते हैं जैसे किसी पहुँचे…
ज़िंदगी में ऐसा मौक़ा नहीं आया कि डर गया हूँ : एम एफ़ हुसैन
आधुनिक कला गुरुओं की श्रेणी में, एक नाम जो बीसवीं सदी की भारतीय कला का पर्याय है, वह है एम.एफ. हुसैन का। उन्होंने आधुनिक भारतीय कला के लिए एक धर्मनिरपेक्ष भाषा की कल्पना की, जिसने भारत की ‘सामंजस्यपूर्ण संस्कृति’ को…









