अजब कहानी, शहरों के विकास की
अब ऐसा समय आ गया है जिसमें हमें विकास की अपनी समझ की गलती दिखाई देने लगी है, लेकिन फिर भी हम उसे मानना नहीं चाहते। यदि मान लेते तो शायद उसे बदलना नहीं, तो कम-से-कम सुधारना शुरु हो गया…
सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक
अब ऐसा समय आ गया है जिसमें हमें विकास की अपनी समझ की गलती दिखाई देने लगी है, लेकिन फिर भी हम उसे मानना नहीं चाहते। यदि मान लेते तो शायद उसे बदलना नहीं, तो कम-से-कम सुधारना शुरु हो गया…