राजेन्द्र सिंह

बजट 2026–27 में रेयर अर्थ और भारत की प्रकृति-संस्कृति

केंद्रीय बजट 2026–27 में रेयर अर्थ को रणनीतिक और सुरक्षा ज़रूरतों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है, लेकिन इसके साथ ही देश की पर्वतमालाओं, विशेषकर अरावली, पर नए खनन दबाव की आशंका भी गहराती दिख रही है। पर्यावरणविदों और स्थानीय…

अरावली पर बढ़ते खनन संकट के विरुद्ध संकल्प : अरावली पर्वतमाला को बचाने की पुकार

विश्व पर्वत दिवस पर अरावली का संकट राष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। निर्णयों ने पर्वतमाला के बड़े हिस्से को खनन के लिए सौंपने का रास्ता खोल दिया है, जिससे गाँवों की जल–कृषि व्यवस्था, वन्यजीवों का जीवन और पर्यावरणीय…

देश की रीढ़ अरावली : दर्द न जाने कोय

अरावली की जिस पर्वतमाला को बचाने के लिए नब्बे के दशक में समाज के साथ साक्षात सुप्रीम कोर्ट तक आगे आया था, आज उसके हाल बेहाल हैं। तरह-तरह की कोशिशों के बावजूद भारत की इस ‘रीढ़’ को बर्बाद किया जा…

सनातन जीवन-दर्शन : प्रकृति और संस्कृति से जुड़ी जीवन पद्धति

भारतीय जीवन-दर्शन का मूल प्रकृति और संस्कृति के उस सनातन योग में निहित है, जिसने पंचमहाभूतों से सृष्टि की रचना की और मानव जीवन को आचार-विचार, आरोग्य, संतुलन व समृद्धि का मार्ग दिया। जैसे-जैसे यह योग टूटता गया, आर्थिकी, पारिस्थितिकी…

ब्राजील : जलवायु शिखर सम्मेलन कोप 30 और पृथ्वी की पुकार

ब्राजील के बेलेम शहर में जलवायु पर शिखर सम्मेलन COP30 शुरू हो रहा है, जिसमें 200 देशों के 50,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन 10 से 21 नवंबर तक चलेगा और इसका मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से निपटना है।…

हिंद स्वराज से जलवायु संकट तक : गांधी की चेतावनी और आज की दुनिया

महात्मा गांधी ने हिंद स्वराज में जिस ‘सभ्यता’ को हालात कहा था, वही आज के जलवायु संकट की जड़ बन चुकी है। बापू ने सौ साल पहले चेतावनी दी थी कि अगर दुनिया यूरोप-अमेरिका के उपभोगवादी रास्ते पर चली, तो…

जीवनदायनी नदियां : नदियों को नालों में बदलता समाज

यह जानने के लिए कोई भारी–भरकम शोध की जरूरत नहीं है कि देशभर की तमाम छोटी-बडी नदियां बदहाल हैं और उनमें से अधिकांश अपने आखिरी दिन गिन रही हैं। सचराचर जगत की जीवनदायिनी नदियां आखिर क्यों इतनी बेहाल हैं? क्या…

भारत का भू-सांस्कृतिक मानचित्र : संस्कृति और प्रकृति की समरसता का दस्तावेज

भारत की विविध भूमि, जलवायु और सांस्कृतिक पहचान को एक साथ दर्शाने वाला “भारत का भू-सांस्कृतिक मानचित्र” तरुण भारत संघ की एक अभिनव पहल है। यह मानचित्र देश की आत्मा से जुड़ी प्रकृति और संस्कृति के रिश्ते को उजागर करता…

नक्सलवाद : हिंसा का जवाब हिंसा नहीं, क्या हो असली समाधान?

छत्तीसगढ की लाचारी, बेकारी और बीमारी नक्‍सलवाद को जन्म दे रही है। नक्सलवाद और बागीपन हिंसा है, लेकिन हिंसा को हिंसा से ठीक कभी नहीं किया जा सकता। हिंसा को स्नेह से सम्मान देकर बदला जा सकता है; इसलिए राज-समाज…

गंगा के उपासक जीडी अग्रवाल : अविरलता के लिए आत्मोत्सर्ग

गंगा की अविरलता को बरकरार रखने के लिए 111 दिन के अपने उपवास के बाद प्राण त्यागने वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ऐसे बिरले लोगों में हैं जिन्होंने गंगा को जीवित रखने के लिए विज्ञान और आध्यात्म…