ब्राजील : जलवायु शिखर सम्मेलन कोप 30 और पृथ्वी की पुकार
ब्राजील के बेलेम शहर में जलवायु पर शिखर सम्मेलन COP30 शुरू हो रहा है, जिसमें 200 देशों के 50,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन 10 से 21 नवंबर तक चलेगा और इसका मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से निपटना है।…
हिंद स्वराज से जलवायु संकट तक : गांधी की चेतावनी और आज की दुनिया
महात्मा गांधी ने हिंद स्वराज में जिस ‘सभ्यता’ को हालात कहा था, वही आज के जलवायु संकट की जड़ बन चुकी है। बापू ने सौ साल पहले चेतावनी दी थी कि अगर दुनिया यूरोप-अमेरिका के उपभोगवादी रास्ते पर चली, तो…
जीवनदायनी नदियां : नदियों को नालों में बदलता समाज
यह जानने के लिए कोई भारी–भरकम शोध की जरूरत नहीं है कि देशभर की तमाम छोटी-बडी नदियां बदहाल हैं और उनमें से अधिकांश अपने आखिरी दिन गिन रही हैं। सचराचर जगत की जीवनदायिनी नदियां आखिर क्यों इतनी बेहाल हैं? क्या…
भारत का भू-सांस्कृतिक मानचित्र : संस्कृति और प्रकृति की समरसता का दस्तावेज
भारत की विविध भूमि, जलवायु और सांस्कृतिक पहचान को एक साथ दर्शाने वाला “भारत का भू-सांस्कृतिक मानचित्र” तरुण भारत संघ की एक अभिनव पहल है। यह मानचित्र देश की आत्मा से जुड़ी प्रकृति और संस्कृति के रिश्ते को उजागर करता…
नक्सलवाद : हिंसा का जवाब हिंसा नहीं, क्या हो असली समाधान?
छत्तीसगढ की लाचारी, बेकारी और बीमारी नक्सलवाद को जन्म दे रही है। नक्सलवाद और बागीपन हिंसा है, लेकिन हिंसा को हिंसा से ठीक कभी नहीं किया जा सकता। हिंसा को स्नेह से सम्मान देकर बदला जा सकता है; इसलिए राज-समाज…
गंगा के उपासक जीडी अग्रवाल : अविरलता के लिए आत्मोत्सर्ग
गंगा की अविरलता को बरकरार रखने के लिए 111 दिन के अपने उपवास के बाद प्राण त्यागने वाले प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ऐसे बिरले लोगों में हैं जिन्होंने गंगा को जीवित रखने के लिए विज्ञान और आध्यात्म…
ब्राजील से ”विश्व जल शांति अभियान” का आगाज : अहिंसामय समाज के निर्माण की पहल
मानवता पर आए संकट का समाधान अब प्राकृतिक सुरक्षा में ही है। आज का हमारा आर्थिक ढांचा बहुत विस्तार पा गया है। इससे जलवायु परिवर्तन के संकट ने चारों ओर असुरक्षा पैदा कर दी है। इस प्राकृतिक सुरक्षा कवच की…
पुनर्जीवित नदी पार्बती के प्रेम और सैरनी के शेरों का बुलावा
18, 19 और 20 मई को सैरनी के तट पर जल योद्धाओं का मिलन सम्मेलन चंबल घाटी की सूख चुकी सैरनी नदी अब शुद्ध सदानीरा होकर बह रही है। मई के माह में भी सैरनी नदी में पूर्णतः जल प्रवाह…
ऋषि-खेती की मार्फत सम्पन्नता
आधुनिक तकनीक और प्रबंधन के संग-साथ से पनप रही आज की खेती जहां एक तरफ, उत्पादन में वे अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है, जिनके नाम पर इसे बढाया, फैलाया जाता रहा है और दूसरी तरफ, उसके चलते खेती…
मेवात और गांधी: सत्य को दबाकर इतिहास बदला जा रहा है
नफरत और हिंसा से भरा पूर्वाग्रह अब भारत को धर्म-निरपेक्ष बनाकर जाति और वर्गों में बाँटना चाहता है। इसीलिए उनके हत्यारे अब सत्य और अहिंसा को केवल नफरत और हिंसा में बदलना, उनके सभी प्रतीकों को बदलकर, नष्ट करके इतिहास…









