राजेन्द्र सिंह

सत्याग्रह से बापू की विरासत बचेगी

विरासत स्वराज यात्रा सत्याग्रह एक उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य है। बापू ने ‘नमक सत्याग्रह’ साबरमती आश्रम से शुरू किया था; उसे भी आज मिटाया जा रहा है। सादगी, समता, शांति, अहिंसामय द्वारा ‘हिंसक सत्ता से सत्य के लिए आग्रह’ करना ही…

‘म्यूटिड’ होकर मारता है, कोरोना

पिछले डेढ-दो साल से कोरोना वायरस का संकट हमें हलाकान किए है। एलोपैथी, होम्योपैथी से लेकर आयुर्वेद तक में इसके तरह-तरह के इलाज पता चले हैं। प्रस्तुत है, आयुर्वेद की दृष्टि से कोरोना वायरस को समझने की एक पद्धति पर…

सुन्दरलाल बहुगुणा : प्रेरक ऊर्जा देने वाले पुंज

सुन्दरलाल बहुगुणा जी उच्च संत है। कलयुग में प्रकृति और पर्यावरण संरक्षक है। प्राकृतिक मित्र तो अपना आयु का काल पूरा ही करते है। उन्हें कोविड़ ने आज हमारे से अलग कर दिया है। यह बेहद दुखद है। सुन्दरलाल बहुगुणा…

देशी ज्ञान से रोका जा सकता है, पर्यावरण-विनाश

आज के समय का एक बडा संकट जलवायु-परिवर्तन और पर्यावरण-विनाश है जिससे निपटने की तजबीज खोजने में दुनियाभर के ज्ञानी अहर्निश लगे हैं। क्या इस संकट से हम अपनी ठेठ देशी पद्धतियों की मार्फत नहीं निपट सकते? आज की प्रचलित…

किसान भारत की आत्मा है, उसे सम्‍मान दें

किसान और सरकार वार्ता के छः दौर पूरे हुए है। सीधी मामूली माँग है। किसान विरोधी जो तीन कानून अलोकतांत्रिक तरीके से बनाये है, उन्हें जल्दी से जल्दी रद्द करो। इस मांग के ऊपर ज्यादा संवाद या वार्ता में समय…

तरुणाई ने सम्पूर्ण क्रांति से प्रौढ़ता पायी है

अहिंसा का रास्ता ही लोकनायक जे.पी. ने पकड़ा था। उनके बनाये सम्पूर्ण क्रांतिदूतों ने भी अहिंसा को ही अपनाया है। इनके जीवन में अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्यचर्य, असंग्रह, शरीर-श्रम, अस्वाद, सर्वत्र भयवर्जन, सर्वधर्म समानत्व, स्वदेशी स्पर्श भावना को विनम्रतापूर्ण से…

गंगत्व बचाने का काम लोकतंत्र में ‘लोक राजनीति’ से ही सम्भव

गंगा को अब लोक राजनीति से ही बचा सकते हैं। यह लोक राजनीति के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है। इस हेतु सभी अपनी निजी पहचान भूलकर एकाकर संगठित होकर लोक राजनीति में जुटें। गंगत्व बचाने का काम लोकतन्त्र में लोक राजनीति…

जी. डी. अग्रवाल के बलिदान को कैसे स्मरण करेगें?

जन्म दिवस (20 जुलाई) स्मरण प्रसंग प्रोफेसर जी डी अग्रवाल गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए प्रतिबद्ध संत थे. उन्हें स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से भी जाना जाता था. आईआईटी का यह एक प्रोफेसर था, जिसे…

पर्यावरण पर किया जाता प्रहार भी हिंसा ही है

जल, जंगल, जमीन, हवा जैसे प्राकृतिक संसाधनों को भरपूर मुनाफे के लिए बेरहमी से लूटना, दुहना एक तरह की हिंसा ही है। यह हिंसा धीरे-धीरे समाज में जगह बनाती है और फिर इंसानों के बीच अपने क्रूरतम रूप में अवतरित…