अकेलापन अब सिर्फ़ भावनात्मक अनुभव नहीं रहा, बल्कि यह धूम्रपान और मोटापे जितना घातक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह युवाओं में आत्महत्या के जोखिम को कई गुना बढ़ाता है और बुजुर्गों में हृदय रोग व डिमेंशिया का बड़ा कारण…
11 सितंबर को आचार्य विनोबा भावे की 130वीं जयंती पर हम उस महापुरुष को स्मरण करते हैं, जिसने सत्य, अहिंसा और सेवा को जीवन का मूलमंत्र बनाया। “जय जगत” का उनका संदेश विश्वबंधुत्व, न्याय और समता पर आधारित था। भूदान…
यदा-कदा प्लास्टिक की पन्नी बीन लेने, जीव-दया के नाम पर आवारा कुत्तों को दो-पांच रुपयों के बिस्किट खिला देने, कभी-कभार बिगड़ती हवा की लानत-मलामत कर देने और तीज-त्यौहारों पर पेड़ लगा देने को पर्यावरण संरक्षण मानने वालों को ‘ग्लोबल विटनेस’…
डॉ. देवेंद्र कुमार गुप्ता ने विज्ञान को गांव की मिट्टी, समाज और सेवा से जोड़ा। गांधी, विनोबा और ठक्कर बापा की प्रेरणा से उन्होंने ऐसी तकनीकें विकसित कीं, जो गरीबों, महिलाओं और किसानों की गरिमा बढ़ाने वाली थीं। जन्मशताब्दी वर्ष…
स्मृति शेष यदि आप जैसलमेर की किसी भी गली में यह पूछें कि क्या किसी ने गोडावण देखा है, तो जवाब में राधेश्याम विश्नोई Radheshyam Pemani Bishnoi का नाम अवश्य सुनने को मिलेगा। गोडावण, यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड—वह दुर्लभ पक्षी,…
पर्यावरणविद् राजेन्द्र सिंह से कुमार सिद्धार्थ की बातचीत मध्यप्रदेश–राजस्थान की सीमा पर एक आमफहम-सी, साल के अधिकांश समय सूखी रहने वाली नदी थी–सैरनी। यह इलाका डकैती के अलावा भीषण गरीबी की चपेट में है, इतनी गरीबी कि वहां बसी सहरिया…
जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से सक्रिय हैं रंजन पांडा देश के अग्रणी पर्यावरणविदों में से प्रमुख रंजन पांडा, जिन्हें ‘वॉटर मैन ऑफ ओडिशा’ और ‘क्लाइमेट क्रूसेडर’ के रूप में जाना जाता है, को वर्ल्ड…
संपूर्ण क्रांति विद्यालय, सर्वोदय आंदोलन और परमाणु-विकिरण विरोधी अभियानों की एक निर्भीक आवाज अब खामोश हो गई है सूरत, 29 अप्रैल। सर्वोदय आंदोलन की वरिष्ठ नेत्री, चिकित्सक, गांधीवादी कार्यकर्ता और परमाणु ऊर्जा नीति की आलोचक डॉ. संघमित्रा गाडेकर Dr. Sanghamitra…
अगर आज पेड़ काट दिए गए, तो कल हमारी साँसे भी कट जाएँगी इंदौर, 13 अप्रैल। इंदौर की पहचान सिर्फ उसकी सफाई या विकास योजनाओं से नहीं, बल्कि उसकी हरियाली और जागरूक नागरिकों से भी है। हाल ही में हुकुमचंद…
पुस्तक समीक्षा आशीष दशोत्तर की किताब ‘घर के जोगी’ में जिन 54 कवियों, साहित्यकारों को संजोया गया है वे यूं तो दुनिया-जहान में साहित्य क्षेत्र के जाने-पहचाने नामधारी हैं और इस लिहाज से स्थानीय नहीं कहे जा सकते, लेकिन जब…