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सिंहस्थ कुंभ  से पहले नासिक में जहरीले पानी का संकट

सिंहस्थ कुंभ  से पहले नासिक में जहरीले पानी का संकट
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महाराष्ट्र के नासिक में 2027 के सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के बीच औद्योगिक प्रदूषण ने गोदावरी की स्वच्छता और स्थानीय आबादी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पर्यावरण संगठन SANDRP की रिपोर्ट के मुताबिक, अंबड़ औद्योगिक क्षेत्र के पास एक बोरवेल के पानी में कैंसरकारी हेक्सावैलेंट क्रोमियम की मात्रा निर्धारित पेयजल मानक से 1,006 गुना अधिक मिली है।


महाराष्ट्र के नासिक में 2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच औद्योगिक प्रदूषण का गंभीर मामला सामने आया है। पर्यावरण संगठन साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) की 8 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के अंबड़ औद्योगिक क्षेत्र के पास एक बस्ती के बोरवेल से लिए गए पानी के नमूने में कैंसरकारी हेक्सावैलेंट क्रोमियम की मात्रा 50.3 मिलीग्राम प्रति लीटर मिली। यह भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के पेयजल मानक 0.05 मिलीग्राम प्रति लीटर से 1,006 गुना ज्यादा है।

रिपोर्ट के अनुसार, नमूने में कुल क्रोमियम की मात्रा 50.5 मिलीग्राम प्रति लीटर थी। जांच के लिए पानी का नमूना 3 अक्टूबर को लिया गया था और इसे एक मान्यता-प्राप्त प्रयोगशाला में जांचा गया। SANDRP ने आशंका जताई है कि औद्योगिक अपशिष्ट से दूषित पानी स्थानीय नाले के रास्ते गोदावरी नदी तक पहुंच रहा है। हालांकि, नदी में प्रदूषण का वास्तविक स्तर और उसका विस्तार निर्धारित करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर नमूनों की जांच जरूरी है।

बोरवेल का पानी पीला, घरेलू कामों में इस्तेमाल की मजबूरी

SANDRP की रिपोर्ट में स्थानीय कार्यकर्ताओं रोशन केदार और राजेश पंडित के प्रयासों तथा संगठन की प्रतिनिधि परिणीता दांडेकर की क्षेत्रीय पड़ताल का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, बस्ती के कई बोरवेल से चमकीले पीले रंग का पानी निकलने की शिकायत थी।

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नासिक नगर निगम की ओर से पानी की कम और अनियमित आपूर्ति के कारण प्रभावित परिवार इसी पानी का इस्तेमाल नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने जैसे घरेलू कामों के लिए कर रहे हैं।

रिपोर्ट में बच्चों के शरीर पर फफोले और न भरने वाले घाव, त्वचा संबंधी परेशानियों तथा कुछ लोगों में लसीका ग्रंथियों में सूजन की शिकायतों का जिक्र किया गया है। दो महिलाओं ने गर्भपात होने की बात भी कही है। हालांकि, इन स्वास्थ्य समस्याओं का दूषित पानी से सीधा संबंध स्थापित करने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

संगठन के मुताबिक, प्रभावित कामकाजी परिवार इलाज, घावों की देखभाल और वैकल्पिक व्यवस्था पर अपनी मासिक आय का बड़ा हिस्सा खर्च कर रहे हैं। ऐसे में मामला केवल पर्यावरण प्रदूषण का नहीं, बल्कि सुरक्षित पेयजल और सार्वजनिक स्वास्थ्य का भी है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई पर सवाल

SANDRP ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने 30 सितंबर को मीडिया में पीले पानी की खबरें आने के बाद केवल एक कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। संगठन का कहना है कि पानी की जांच के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए और प्रभावित निवासियों को भी संभावित खतरे के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।

हालांकि, प्रदूषण के लिए जिम्मेदार इकाइयों की पहचान, बोर्ड की अब तक की पूरी कार्रवाई और भूजल में प्रदूषण के फैलाव की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। केवल एक नमूने के आधार पर पूरे औद्योगिक क्षेत्र या गोदावरी नदी के पानी की स्थिति तय नहीं की जा सकती।

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SANDRP ने अंबड़ औद्योगिक क्षेत्र की संबंधित इकाइयों की व्यापक जांच, दूषित बोरवेल बंद करने, प्रभावित परिवारों को रोजाना वैकल्पिक पानी उपलब्ध कराने और मुफ्त स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है। संगठन ने नंदिनी नदी तंत्र और गोदावरी में प्रदूषण के स्तर की जांच कर नतीजे सार्वजनिक करने की भी मांग की है।

गोदावरी और कुंभ की तैयारियों के बीच बड़ा सवाल

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में 2027 में सिंहस्थ कुंभ आयोजित होना है। गोदावरी नदी यहां धार्मिक स्नान का प्रमुख केंद्र है। SANDRP ने चेतावनी दी है कि यदि औद्योगिक अपशिष्ट के जरिए नदी में जहरीले रसायन पहुंच रहे हैं, तो इसका असर स्थानीय आबादी के साथ नदी पर निर्भर अन्य लोगों पर भी पड़ सकता है।

संगठन की रिपोर्ट में कुंभ के ध्वजारोहण का कार्यक्रम 31 अक्टूबर 2026 बताया गया है। ऐसे में नदी की गुणवत्ता और औद्योगिक प्रदूषण की जांच आयोजन की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए।

प्रशासन के सामने अब तीन तात्कालिक चुनौतियां हैं—प्रभावित बस्ती को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना, प्रदूषण के स्रोत की पहचान कर जिम्मेदार इकाइयों पर कार्रवाई करना और गोदावरी में पानी की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराना।

कुंभ की तैयारियों में घाटों, सड़कों और अन्य सुविधाओं का विकास जरूरी है, लेकिन नदी और स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं के स्नान से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित घाटों के पानी की गुणवत्ता कैसी है और प्रदूषण रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

लेखक का परिचय

अमन नम्र

दस वर्षों तक चरखा फीचर सेवा के सम्पादक रह चुके अमन नम्र आजकल दैनिक भास्‍कर में अपनी सेवाएं दे रहे है। वे ब्‍लागर है, लगातार लिखते रहते है। उनकी भाषा, पकड़ और सरोकार आकर्षक हैं।

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