Month: April 2026

विदेशी जीएम लॉबी के चंगुल में भारत की खाद्य संप्रभुता को खतरा, केंद्र को जीएम-मुक्त भारत गठबंधन ने किया आगाह

नई दिल्ली, 20 अप्रैल । जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) फसलों के आयात और उनके संभावित प्रभाव को लेकर देश में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ‘जीएम-मुक्त भारत गठबंधन’ (Coalition for a GM-Free India) ने केंद्र सरकार को एक…

कृत्रिम बुद्धिमत्ता बनाम प्रकृति : अरावली और हमारे संवैधानिक दायित्व

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार प्रतीत होने वाला अरावली संबंधी सरकारी एफिडेविट भविष्य के लिए गंभीर चिंता पैदा करता है। इसमें न प्रकृति की समझ झलकती है, न सांस्कृतिक दृष्टि। संवैधानिक दायित्वों और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण प्रतिबद्धताओं की अनदेखी से पहाड़ों का…

जेपी आंदोलन से पर्यावरण संघर्षों तक सक्रिय रहीं अनुराधा सिंह का निधन

सादगी, समर्पण और प्रकृति से गहरे जुड़ाव की मिसाल थीं भोपाल, 19 अप्रैल। विख्यात सर्वोदय नेता, विचारक और चिंतक आचार्य राममूर्ति जी की पुत्री, पर्यावरण शिक्षण और सजीव खेती से जुड़ी अनुराधा सिंह ( 80 वर्ष) का आज सुबह निधन…

‘जादूगर’ शब्द से क्यों डरती है सत्ता?

संसद में ‘जादूगर’ जैसे हल्के-फुल्के शब्द पर मचा विवाद यह संकेत देता है कि भारतीय राजनीति से हास्य और सहजता तेजी से गायब हो रही है। संवाद की जगह कटुता और आक्रामकता ने ले ली है, जहां व्यंग्य भी असहजता…

तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और महात्‍मा गांधी

रूस-यूक्रेन, इजरायल-गाजा के बाद अब युद्ध पश्चिम एशिया में केन्द्रित होता दिख रहा है। क्या समूचे, भरे-पूरे, जीवन्त देशों को एक-एक करके समाप्त करने का यह कारनामा कच्चे माल, उसे ‘पकाने’ में लगने वाली जरूरी ऊर्जा और बेचने के लिए…

प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक अनंतपद्मनाभन ने जीवन की तरह मृत्यु को भी साधकर ली अंतिम विदाई

सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और साथी मित्र रहे अनंत गंगोला ने याद किए अनंत के जीवन के प्रेरक पल मैसूर, 19 अप्रैल। देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक और संस्थागत नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले अनंतपद्मनाभन गुरुस्वामी का शनिवार,…

भूदान आंदोलन के 75 वर्ष : भूमि, न्याय और नैतिकता की पुकार

इक्कीसवीं सदी के किसी भी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, स्थानीय, यहां तक कि मोहल्ले-पडौस के आपसी द्वंद्वों को देखें तो उनकी बुनियाद में भूमि के वितरण, विभाजन दिखाई देते हैं। ऐसे में साढ़े सात दशक पहले विनोबा भावे की अगुआई में हुए…

चंबल घाटी से फिर उठी अहिंसा की आवाज

भारत डोगरा             इस वर्ष 14 अप्रैल को चंबल घाटी में बागियों-डाकुओं के समर्पण के 54 वर्ष पूर्ण हुए। इस अवसर पर समर्पण करने वाले अनेक बागी यहां एकत्र हुए व उन्होंने अहिंसा व अमन-शांति की राह के लिए अपनी प्रतिबद्धता नए सिरे से दोहराई।…

नंदलाल बोस की कला साधना एवं सर्जना

नंदलाल बोस एक महान भारतीय चित्रकार थे, जिन्होंने आधुनिक भारतीय कला को नई दिशा दी। उनका जन्म 1882 में हुआ और उन्होंने शांति निकेतन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारतीय संविधान की मूल प्रति को सजाने का श्रेय भी उन्हें प्राप्त…

महिला आरक्षण : सशक्तिकरण की पहल या राजनीतिक रणनीति?

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर केंद्र सरकार का विशेष सत्र बुलाना जहां एक ओर नारी सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं इसके पीछे राजनीतिक रणनीति के सवाल भी उठ रहे हैं। परिसीमन, जनगणना और चुनावी…