प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक अनंतपद्मनाभन ने जीवन की तरह मृत्यु को भी साधकर ली अंतिम विदाई

सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और साथी मित्र रहे अनंत गंगोला ने याद किए अनंत के जीवन के प्रेरक पल

मैसूर, 19 अप्रैल। देश के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक और संस्थागत नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाले अनंतपद्मनाभन गुरुस्वामी का शनिवार, 18 अप्रैल को तड़के लगभग 3 बजे शांतिपूर्वक निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और अपने जीवन के अंतिम चरण के लिए उन्होंने स्वयं को और अपने करीबियों को पहले से तैयार कर लिया था।

अनंतपद्मनाभन गुरुस्वामी ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे भारत में एमनेस्टी इंटरनेशनल के सीईओ, ग्रीनपीस के इंटरनेशनल प्रोग्राम डायरेक्टर, अज़ीम प्रेमजी फिलैंथ्रॉपिक इनिशिएटिव्स (APPI) के सीईओ और ‘सोक्रेट्स’ के संस्थापक रहे। आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र और कृष्णमूर्ति फाउंडेशन इंडिया के ‘द स्कूल’ में शिक्षक के रूप में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

उनका जीवन और मृत्यु—दोनों प्रेरणा : योगेंद्र यादव

सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अनंत का जीवन और मृत्यु—दोनों ही हम सभी के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि “जिस तरह का जीवन उन्होंने जिया और जिस सहजता और सजगता के साथ उन्होंने मृत्यु का सामना किया, वह हम सबके लिए एक आदर्श होना चाहिए।”

योगेंद्र यादव ने बताया कि उनकी मुलाकात अनंत से उनकी साथी कविता कुरुगंती के माध्यम से हुई थी। पिछले पाँच वर्षों में अनंत उनके लिए केवल मित्र नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और जीवन-कोच बन गए थे। उन्होंने कहा, “कैंसर को जिस गरिमा और स्वीकृति के साथ उन्होंने अपनाया और मृत्यु की तैयारी की, वह मेरे लिए एक गहरा जीवन-पाठ है।”

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भारत जोड़ो अभियान से जुड़े सहयोगियों ने भी उन्हें विचारों और ऊर्जा के असीम स्रोत के रूप में याद किया। वे जटिल मुद्दों पर गहराई से सोचकर नए और अनोखे समाधान प्रस्तुत करने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते थे।

आईआईटी से कृष्णमूर्ति तक-एक अलग राह का चुनाव

साथी मित्र रहे अंनत गंगोला ने अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए स्‍मरण किया कि अनंत आईआईटी मद्रास में पढ़ता था जब प्रसिद्ध दार्शनिक जिद्दू  कृष्णमूर्ति के संपर्क में आया। IIT की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे कृष्णमूर्ति फाउंडेशन के स्कूल में गणित का शिक्षक बन गये। तमाम कॉर्पोरेट जगत की बड़ी सेलेरी वाली जॉब्स को दरकिनार कर। 

अद्भुत बौद्धिक क्षमता और बाल सुलभ जिज्ञासा से भरे हुए इस नवजवान ने एक दशक गणित के शिक्षक के रूप में बेमिसाल काम किया। फिर सोचा चलो कुछ पैसा कमा लेते हैं। तो कुछ बरस एक अंतर्राष्ट्रीय बैंक का साउथ एशिया का CEO बन गया। फिर वापस सामाजिक सरोकारों ने जोर लगाया तो ग्रीन पीस इंटरनेशनल का ग्‍लोबल डायरेक्टर बन वहाँ भी अनूठा काम किया। उसके बाद के लगभग 20 बरसों में अनंतपद्मनाभन ने दो बड़ी संस्था के फाउंडर CEO रहे, जिसमें एमनेस्टी इंटरनेशनल और अजीम प्रेमजी फिलोन्‍थरोपी जैसी राष्ट्रीय थी। बाद में उन्होंने तीन अन्य संस्थाओं को भी जन्म दिया।

बुद्ध, रमन महर्षि और आदि गुरु शंकराचार्य से लेकर सुकरात और कांत तक किसी भी विषय पर एक रोचक और तर्कसंगत संवाद उनसे सम्भव था। नदी की तरह बहने वाला ये व्यक्तित्व सबके लिए उपलब्ध था। बिना किसी आग्रह के। यानी किसी को सिर्फ किनारे खड़े होकर निहारता हो,  किसी को आचमन करना हो या पानी में पैर लटकाये बैठना हो, या फिर डुबकी ही क्यों न लगानी हो,  सब सम्भव था।

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पैदल चलना और साइकिल चलाना उनका शौक नहीं, जीवन था।

उसके और मेरे घर के बीच कुछ 25 किलोमीटर का फासला है, बैंगलोर में। अक्सर पैदल ही आ जाता। मैं मज़ाक में कहता, भाई वो तो तुम घर वापस चले जाते हो वर्ना सीधे चले रहे होते तो अफगानिस्तान के पार निकल गए होते। वो सिर्फ मुस्कुराता भर नहीं था अपने स्मार्ट फोन में इस बात की पुष्टि के लिए बीते बरस के किलोमीटर का काउन्‍ट भी बता देता।

गाड़ी के नाम पर उसके पास एक ऑटो था और दो एक साइकिल। ऑटो भी रोबर्ट के नाम पर। इसे जब जरूरत हो तो रोबर्ट हाजिर, बाकी समय ऑटो, रोबर्ट का रोजगार।

हमने मिलकर care leavers (वयस्क अनाथ युवाओं) के लिए कुछ काम करने का मन बनाया। अनंत को लगा कि ऐसे युवाओं के लिए स्विगी, जेमोटो के डिलेवरी बॉय बनने का रोजगार उपलब्ध हो सकता है। फिर क्या था,  अनंतपद्मनाभन (AP| ने दो महीने तक डिलेवरी बॉय का काम किया। उस काम की सारी बारीकियों को समझा।

सादगी उसके जीवन से टपकती थी और अध्यात्म उसके विचारों से। 

लगभग 5 बरस पहले, उसे कैंसर डिटेक्ट हुआ। मैं दुख और परेशान होकर उसे मिलने गया। वो तो पूरी तरह सहज था। बल्कि मुझे ही ढाढस बंधा रहा था। मैंने कहा अब क्या करेंगे भाई। तो बोलाशांति से रुखसत होने की तैयारी। मैं आवाक रह गया। मैंने कहा कैंसर से लडाई करेंगे भाई। वो बोला एक अपरिचित से कैसे और क्यूँ झगड़े।

वो नहीं झगडा। पांच साल यूँ ही चलता रहा। गरिमा के साथ और सुबह रुखसत हो लिया। अब वो अपने शरीर में तो नहीं, पर तमाम लोगों के दिलों और स्मृतियों में,जारी रखेगा, अपना सादगी और आध्यात्मिक चिंतन का सफर।

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अनंतपद्मनाभन गुरुस्वामी के निधन से सामाजिक क्षेत्र में एक गहरी क्षति हुई है। उनके विचार, कार्य और जीवन दृष्टि लंबे समय तक लोगों को प्रेरित करते रहेंगे।

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