Month: April 2024

नर्मदा के नातेदार !

‘‘आप नर्मदा को चाहने वाले हैं, और मैं भी नर्मदा को चाहने वाला हूँ। इसलिए हम भाई-भाई हैं।’’ यह कहने वाले लंबी सफे़द दाढ़ी, शैव तपस्वियों का केसरिया बाना पहने एक संन्यासी थे। यह वर्ष 1943 का साल था। नर्मदा नदी के उद्गम और…

चिकित्सा का सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प है होम्योपैथी

10 अप्रैल  : विश्व होम्योपैथी दिवस प्रतिवर्ष 10 अप्रैल को ‘होम्योपैथी’ के जनक माने जाने वाले जर्मन मूल के चिकित्सक, महान विद्वान, शोधकर्ता, भाषाविद और उत्कृष्ट वैज्ञानिक डा. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन के जन्मदिवस के अवसर पर ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’…

लद्दाख : पहाड़ों, नदियों के विनाश के खिलाफ व भविष्य के लिए खड़े होते लोग

पिछले 2 महीनों से 3 लाख आबादी वाले लद्दाख की 10 प्रतिशत आबादी यानि 30 हज़ार से भी ज़्यादा लोग, अपने जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण, अपने रोजगार और समाज और अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं! लद्दाख की 90% आबादी आदिवासी…

चुनाव में नहीं चुना जाता ‘पर्यावरण’

बहुत अधिक पीछे न जाकर पिछले 11-12 वर्षों में घटी प्रमुख त्रासदियों (केदारनाथ, जोशीमठ एवं सिक्किम) त‍था मौसम की चरम घटनाओं को देखते हुए अब यह जरूरी हो गया है कि सभी राजनैतिक दल आगामी लोकसभा चुनाव (2024) में पर्यावरण को महत्व दें।…

स्वास्थ्य अधिकार कानून बनाकर सभी के लिए स्वास्थ्य सुनिश्चित करे

7 से 14 अप्रैल 2024 तक साप्ताहिक स्वास्थ्य अधिकार अभियान चलाने का निर्णय वैश्विक स्तर पर “विश्व स्वास्थ्य दिवस” इस साल “हमारा स्वास्थ्य, हमारा अधिकार” की अवधारणा को केन्द्रित कर मनाया जा रहा है। इस उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर…

गलतियों का हिमालय : जनता को तो अहसास होना ही चाहिए

आजादी की लड़ाई की शुरुआत की बात है। गांधीजी ने ‘असहयोग आंदोलन’ का आह्वान किया था। वैसी देशव्यापी हड़ताल इतिहास में कभी देखी नहीं गई थी ! लगने लगा था कि अंग्रेजों के पांव उखड़ जाएंगे, लेकिन तभी गांधीजी ने अचानक पूरा आंदोलन…

नदियों और नदी घाटी समाजों के अधिकारों की सुरक्षा को चुनावी एजेंडे में शामिल किया जाये

देश-भर के आंदोलनों ने की मांग देश के अलग अलग भौगोलिक क्षेत्रों के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के  राष्ट्रीय नदी घाटी मंच द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र और राज्य सरकारों की विकास संबंधित…

बंद होती बातचीत

नंदिता मिश्र आज हम जिस दुनिया में जी रहे हैं उसमें संचार और सम्पर्क के साधनों की कोई कमी नहीं है। जितना व्यक्तिगत सम्पर्क इस समय हो रहा है, इतना पहले कभी नहीं हुआ होगा। मोबाईल ने तो हमारी दुनिया ही…