Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

स्वास्थ्य अधिकार कानून बनाकर सभी के लिए स्वास्थ्य सुनिश्चित करे

7 से 14 अप्रैल 2024 तक साप्ताहिक स्वास्थ्य अधिकार अभियान चलाने का निर्णय

वैश्विक स्तर पर “विश्व स्वास्थ्य दिवस” इस साल “हमारा स्वास्थ्य, हमारा अधिकार” की अवधारणा को केन्द्रित कर मनाया जा रहा है। इस उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य अधिकार संघर्ष को मजबूत करने के लिए, संवैधानिक और नीतिगत रूप में स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बनाने के लिए, स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों को लोगों के हक के लिए संगठित करने, जागरूक करने और स्वास्थ्य के मानकों पर कार्य करने हेतु तथा सरकार को जनता के प्रति जिम्मेदार बनाने हेतु जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय ने स्वास्थ्य अधिकार अभियान के माध्यम से जनता के पक्ष को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य अधिकार के मुद्दे पर सक्रिय रूप से कार्य करेगा।

उक्‍त जानकारी देते हुए राजकुमार सिन्हा, सुरेश राठोर, अमूल्य निधि, सुहास कोल्हेकर, मेधा पाटकर, राहुल यादव, राकेश चांदौरे ने बताया किराष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार अभियान ने 7 अप्रैल से 14 अप्रैल 2024 तक साप्ताहिक स्वास्थ्य अधिकार अभियान चलाने का निर्णय लिया है। पिछले 10 सालों मे स्वास्थ्य के कार्यों का लेखा जोखा जनता के समक्ष पेश किया जाएगा। साथ ही जनता के स्वास्थ्य के मुद्दों पर राजनीतिक दलों, जन प्रतिनिधियों को रिपोर्ट कार्ड सौंपा जाएगा और जन केन्द्रित स्वास्थ्य व्यवस्था को लागू करने के लिए हर स्तर पर पहल की जाएगी। इस उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार अभियान ने स्वास्थ्य अधिकार पत्र जारी किया गया।

‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार अभियान’ ने जनता के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए सरकार में आने पर जनहित में सार्वजनिक स्वास्थ्य की  मजबूती की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया है तथा स्वास्थ्य सेवाओं को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए एक मजबूत तंत्र बनाया जाए और पारदर्शिता सुनिश्चित किये जाने के संबंध में प्रयास किये जाए।  

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जारी स्वास्थ्य अधिकार पत्र में देश में एक मजबूत “स्वास्थ्य अधिकार कानून” बनाकर लागू किये जाने का आव्‍हान किया है। साथ ही  सभी राज्य सरकारों को एक निर्धारित समय सीमा ने स्वास्थ्य अधिकार कानून बनाकर इसे लागू किये जाने की मांग की है। इसके अलावा अन्‍य मुद्दों पर भी सक्रिय रूप से काम करने की अपेक्षा की है –

  • राज्य सरकार अपने बजट का कम से कम 10% या 5000 प्रति व्यक्ति हिस्सा स्वास्थ्य पर खर्चा करें।
  • देश की जनता को सर्वसुलभ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ शासन की ओर से देने के लिए स्वास्थ्य बजट को सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम 5% आवंटन किया जाए। 
  • ‘आयुष्मान भारत योजना’ जैसी बीमा आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के बजाय सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए। स्वास्थ्य क्षेत्र के सभी अस्पतालों में डाक्टर और पेरा मेडिकल स्टाफ की पर्याप्त बहाली की जाए। हेल्थ इंफ्रा स्ट्रक्चर को मजबूत किया जाए।
  • व्यावसायिक,परमाणु विकिरण और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए एक समग्र नीति बनाई जाए और सभी विकास परियोजनाओं के लिए स्वास्थ्य पर असर का आंकलन अनिवार्य किया जाए। 
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ, इलाज, दवाइयाँ, विभिन्न जाँचे देश की जनता को बिना किसी भेदभाव के सार्वभौमिक रूप से सभी के लिए मुफ्त में उपलब्धता सुनिश्चित होना चाहिए।
  • स्वच्छ पानी, पोषक आहार, रोजगार, के साथ ही स्वास्थ्य के अन्य घटकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
  • स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल के साथ साथ सभी प्रकार के निजी हस्तक्षेप को खत्म किया जाए।
  • निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य केन्द्रों की निगरानी, जिम्मेदारी और इलाज की दर तय करने के लिए ‘क्लिनिकल इस्टेब्लिशमेंट कानून, 2010’ और नियमों को पूरे देश में समरूपता के साथ लागू किया जाए। 
  • निजी अस्पतालों की कमाई को भी टैक्स के दायरे में लाया जाए।  
  • दवाओं की कीमत पर नियंत्रण लागू किया जाए खासकर जीवन रक्षक और आवश्यक दवाओं की कीमतों का नियंत्रण मजबूती से लागू किया जाए और इसके लिए प्रभावी निगरानी तंत्र बनाए जाए। जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा दिया जाए। 
  • सभी प्रकार की दवाओं से जीएसटी हटाया जाए, सभी दवाएँ करमुक्त की जाए।
  • देश के जिला अस्पतालों को निजी मेडिकल कालेजों को देने के नीती आयोग के निर्णय को वापस लिया जाए।  
  • जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए और रसायनिक एवं जेनेटिक मोड़िफाइड खाद्य फसलों की खेती पर रोक लगाई जाए।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून को स्थानिक परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जाए और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक किया जाए।
  • हर गाँव और बस्ती में 3000 की जनसंख्या पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होना चाहिए।
  • आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित किया जाए और मानधन बढ़ाया जाए।
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