मध्यप्रदेश के 274 सिलिकोसिस मृतकों को अब तक नहीं मिला मुआवजा इंदौर। मंगलवार को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में सिलिकोसिस के मामले में विचाराधीन जनहित याचिका की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्री प्रशांत भूषण ने तथ्य प्रस्तुत करते हुए कहा…
राजनीति में रूचि रखने वाले लोग चुनाव के रिजल्ट को आइंसटीन के कठिन सूत्रों की तरह समझने की कोशिश करते रहते हैं और इस कोशिश में वे किसी नेता की सभा में आई भीड़, टेलीवीजन चैनल, मीडिया, व्हाट्सएप आदि के सहारे अपने-अपने अनुमान…
पर्यावरणविद् राजेन्द्रसिंह ने सेवा सुरभि के कार्यक्रम में कहा इंदौर, 23 अप्रैल। इंदौर एक पानीदार शहर है, लेकिन यहां की नदी आईसीयू में पहुंच गई है। उसकी बीमारी का सही ईलाज करने के बजाय आप उसे ब्यूटी पार्लर में ले…
गांधी – विनोबा विचार से जुड़े अनेक संस्थानों ने अर्पित की भावपूर्ण श्रद्धांजलि 22 अप्रैल । 88 साल की उम्र में सोमवार को गांधी विचारक, चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक जगत में सात दशकों से सक्रिय धीरू भाई मेहता का देहांत…
विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) पर विशेष न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी तथा मौसम का निरन्तर बिगड़ता मिजाज गंभीर चिंता का सबब बना है। हालांकि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए…
भारत अपनी बढ़ती युवा आबादी के साथ, एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। ‘मानव विकास संस्थान’ (आईएचडी) और ‘अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन’ (आईएलओ) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई ‘भारत रोज़गार रिपोर्ट – 2024’ युवाओं में रोज़गार के बहुआयामी परिदृश्य पर प्रकाश डालती है। भारत की युवा…
वैश्विक गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) ऑक्सफैम (ऑक्सफोर्ड कमेटी फॉर फेमिन रिलीफ) द्वारा 21 मार्च 2024 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की सबसे प्रभावशाली खाद्य और कृषि कंपनियों में से केवल एक चौथाई ने ही अपने पानी के उपयोग को कम करने और जल…
आम चुनाव में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने घोषणा-पत्र तैयार किये हैं, लेकिन अपेक्षाओं के विपरीत भारत की 42 प्रतिशत जनसंख्या, यानी युवाओं और बच्चों के मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं है। कुछ दलों के घोषणा-पत्रों में टोटकों की तरह बच्चों…
पचास के दशक में विनोबा भावे की अगुआई में शुरु हुआ ‘भूदान आंदोलन’ अब किस परिस्थिति में है? क्या उसने अपने घोषित उद्देश्यों में कुछ हासिल किया है? आज भूमि वितरण के इस महायज्ञ में क्या जोडा जा सकता है?…
मानव सभ्यता प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर उन्नत तो हुई है, किन्तु हमारी ऊर्जा की खपत भी बढ़ती जा रही है। यदि इसी तरह ऊर्जा के परम्परागत साधनों का उपयोग बढ़ता गया, तो भविष्य में भयानक ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा।…