Year: 2023

खेती से खत्म होता पानी : उरुग्वे का उदाहरण काफी है

इंसानी वजूद के लिए जरूरी हवा, पानी और भोजन की त्रयी में से पानी तेजी से विलुप्त होता जा रहा है। वजह है, नए आधुनिक तरीकों से होने वाली खेती और उद्योग। क्या होता है जब बुनियादी मानवीय जरूरतों को…

कुत्ते : अच्छे-खासे दोस्त, बन गए कटखन्ने

देश में हर साल करीब पौने दो करोड़ लोगों को कुत्ते काट लेते हैं| इनमें से अठारह से बीस हज़ार इंसानों को हर साल रेबीज़ Rabies होता है| रेबीज़ कुत्तों से इंसानों में होने वाला गंभीर रोग है| यह बिल्ली…

स्वार्थ की सत्ता ने खड़ा किया इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष

अंग्रेजों की नजर से ‘मिडिल-ईस्ट’ यानि ‘मध्य-पूर्व’ माने गए अरब देशों में जिस तरह की आपसी और आंतरिक लडाईयां जारी हैं, हाल का इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष उसी का एक विस्तार है। योरोप और अमरीका के अमीर देशों की तेल और दूसरे…

संविधान : सभ्यता के संरक्षण के लिए आंबेडकर के विचार

क्या हमारा संविधान रचने वालों ने कभी मौजूदा हालातों की कोई कल्पना की थी? क्या वे देख पा रहे थे कि देश सात-साढ़े सात दशकों में कहां-से-कहां पहुंच जाएगा? डॉ. आंबेडकर को शायद इसका भान था और इसीलिए वे बार-बार…

शिक्षा : पढ़ाई के नाम पर पिटाई की परिपाटी

भारत में बच्चों को शारीरिक दंड देने की आदत यथावत बनी हुई है| बच्चे को अनुशासित करने में इसकी व्यर्थता साबित होने के बावजूद| पिटा हुआ और घायल बच्चा कभी ज़िम्मेदार नागरिक नहीं बन सकता| एक इंसान के रूप में…

कबीर की निडरता और गांधी के सत्याग्रह का संदेश देती है ढाई आखर प्रेम पदयात्रा

पटना से फ़िरोज़ ख़ान की रिपोर्ट पटना। ढाई आखर प्रेम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जत्था के बिहार पड़ाव ‘बापू के पदचिह्न’ का समापन 14 अक्टूबर को हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर ढाई आखर प्रेम पदयात्रा की शुरुआत 28 सितम्बर को अलवर, राजस्थान से…

श्राद्ध-पक्ष : कौन है ‘फूलधारी’ पौधों का पूर्वज?

हिन्दू परम्परा में श्राद्ध-पक्ष पूर्वजों को याद करने की खातिर मनाया जाता है, लेकिन क्या हम कभी अपने आसपास की प्रकृति के पूर्वजों का भी स्मरण कर पाते हैं? रोटी, कपडा और मकान की बुनियादी जरूरतों के लिए परम्परा से…

नरगिस मोहम्मदी : हिरासत में जीता, शांति के लिए नोबेल पुरस्कार

अपनी राजनीति, बाजार-हितैषी चरित्र और नस्ली पूर्वाग्रहों के बावजूद नार्वे की नोबेल पुरस्कार समिति कभी-कभार कमाल कर देती है। इस बार उसने यह कारनामा ईरान की जेल में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को शांति के नोबेल के लिए चुनकर…

सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के बजाय नीतियाँ स्वास्थ्य क्षेत्र में निजीकरण को दे रही बढ़ावा

सार्वजनिक स्वास्थ्य विद्वान प्रोफेसर डॉ. इमराना कदीर ने व्‍यक्‍त किये उद्गार   भोपाल, 2 अक्टूबर 2023। आज की नीतियाँ स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दे रही हैं। सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल के स्थान पर कवरेज पर ध्यान केन्द्रित कर…

गांधी जयंती : महात्‍मा गांधी के रचनात्मक कार्य

महात्मा गांधी ने अपने विचारों के क्रियान्वयन के लिए अनेक संस्थाओं का निर्माण किया था। 48 में, उनके जाने के बाद सभी को मिलाकर दो प्रमुख संस्थाएं बनाई गईं, परन्तु आज इन संस्थाओं के क्या हाल हैं? क्या आज भी…