‘सेवा सुरभि’ एवं प्रेस क्लब द्वारा संवाद में शहर के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों की बेबाक राय इंदौर, 9 जुलाई। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर चर्चा करने का यही सही समय है। इस मुद्दे को किसी धर्म विशेष अथवा पार्टी…
स्मृति शेष : फोटो पत्रकार राजीव कांत राजीव नाम से चर्चित राजीवकांत बिहार के चर्चित फोटो जर्नलिस्ट रहे हैं। उनके जीवन में,उनकी नैतिकता में, उनके संस्कार में पैसे महत्वपूर्ण नहीं रहे। वे जीवन को संपूर्णता के साथ जीते-देखते रहे। राजीवकांत…
प्रधानमंत्री जैसी खास कुर्सी पर बैठा कोई आदमी आज देश के भ्रष्टाचारियों की सूची की सार्वजनिक घोषणा करता है और कल उन सभी भ्रष्टाचारियों को अपनी सरकार में कुर्सी पर बिठा लेता है ? मतलब, वह दिखाना चाहता है कि…
वन कटाई और अत्याचार के खिलाफ आदिवासियों के हित में लड़ने वाली सामाजिक कार्यकर्ता माधुरी बहन को किया जिला बदर BURHANPUR, 8 जुलाई। शु्क्रवार को जिला कलेक्टर, बुरहानपुर द्वारा जागृत आदिवासी दलित संगठन की प्रमुख एवं ख्याननाम सामाजिक कार्यकर्त्ता माधुरी…
राजेंद्र सिंह राठौर इन दिनों जैविक खेती organic farming की भारी धूम मची है और अब मुनाफा कूटने वाले बाजार ने भी इस पर अपना कब्जा जमा लिया है, लेकिन जैविक खेती करने वाले किसानों के साथ हो रही फजीहत…
व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के लिए भय एक ऐसी बीमारी है जो सतत कमजोर करती है। लालच, प्रतिस्पर्धा, हायरार्की यानि श्रेणी-बद्धता आदि वजहों से भय फलता-फूलता है और नतीजे में एक-दूसरे से डरते हुए हम लगातार कमजोर होते जाते हैं।…
जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश ने की मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निर्णय वापस लेने की मांग इंदौर 6 जुलाई 2023। प्रदेश में स्वास्थ्य संबंधी जन सरोकारी मुद्दों पर पहल करने वाले Jan Swasthy Abhiyan जन स्वास्थ्य अभियान, मध्यप्रदेश ने मध्यप्रदेश के 13 मेडिकल…
संजय घोष : 26 वीं पुण्यतिथि आज संजय घोष की 26वीं पुण्यतिथि है, यह वैकल्पिक मीडिया और वालंटियर सेक्टर के लिए उन्हें और उनकी सोच को याद करने का सही अवसर है। दिल्ली में 1994 में चरखा डेवलमेंट कम्यूनिकेशन नेटवर्क…
केंद्र सरकार ने केरल की उधार लेने की क्षमता पर अनुचित प्रतिबंध लगाकर एक ही झटके में उससे लगभग 15000 करोड़ छीन लिए है। इस कारण निकट भविष्य में केरल गंभीर वित्तीय संकट में पड़ सकता है, जिससे इसकी कई…
ओबामा को समझाया जाना चाहिए कि मोदी-शाह-योगी भारतीय संस्कृति की मूल आत्मा नहीं हैं। भारत की मूल आत्मा सर्वधर्म समभाव की है और यही राष्ट्र का स्थायी चरित्र है। ऐसा नहीं होता तो सवा दो सौ सालों (1526-1761) में मुग़ल…