Month: August 2022

कोराड़ी थर्मल पावर : कोयले से बिजली, बिजली से राखड़ और राखड से तबाही

हमारे यहां बिजली के लिए कोयले का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है, लेकिन उससे पैदा होने वाली राख पर्यावरण, पानी, खेती और हवा तक को खतरे में डालती है। पिछले महीने महाराष्ट्र के नागपुर में राखड के तालाब टूटने के…

देश के विभिन्न राज्यों और स्वीडन में राजेंद्र सिंह एवं डॉ. इंदिरा खुराना द्वारा लिखित पुस्‍तक “Rejuvenation of Rivers” का विमोचन

तरुण भारत संघ के अध्यक्ष एवं जाने माने जलयोध्‍दा, पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह और तरुण भारत संघ  की उपाध्यक्ष डॉ. इंदिरा खुराना की संयुक्‍त लिखी पुस्तक “Rejuvenation of Rivers- Climate change |Livelihood | Dignity | living Example का विमोचन इंस्टीट्यूट ऑफ…

राष्ट्रीय खेल दिवस : सेहत बनाने का सीधा, सरल रास्ता

खेलकूद में बच्चों की एक स्वाभाविक रूचि होती है| वे हर समय खेलना चाहते हैं, पर अपने अनुभवों से दबे-पिसे वयस्क उनको पढ़ाई-लिखाई पर अधिक ध्यान देने और खेलकूद पर समय बर्बाद न करने की हिदायतें देते नहीं थकते| पीढ़ियों…

मंदसौर गोलीकांड की रिपोर्ट को सार्वजानिक करने हेतु याचिका दायर

शासन को तीन हफ़्तों में वस्तुस्थिति स्पष्ट करने हेतु आदेश रतलाम, 23 अगस्‍त । उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर में दायर एक जनहित याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय ने शासन को यह आदेश दिया कि वह मंदसौर गोलीकांड की जांच के…

आधुनिक खेती के खतरे

आंकडे और अध्ययन बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक असर खेती पर पड रहा है। नतीजे में उत्पादन, बीज, मिट्टी, पानी, यहां तक कि भूख, सभी संकट में फंसते जा रहे हैं। क्या इससे पार पाने का कोई तरीका…

आज कठघरे में अपराधी नहीं, अदालत ही खड़ी है

बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म और लोगों की हत्या मामले में गांधी-विचार संगठन का बयान नईदिल्‍ली, 19 अगस्‍त। गांधी शांति प्रतिष्ठान और राष्ट्रीय युवा संगठन द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि गुजरात के गोधरा में उम्र कैद की सजा…

मानसून में मजे के साथ संकट

देश में 60-62 फीसदी सिंचाई के लिए जिम्मेदार मानसून बहुत आनंददायी होता है। उत्सव के दर्जे का ऐसा मानसून अपने साथ कई ऐसी आपदाएं भी लाता है जिनसे निपट पाना अक्सर कठिन होता है। मानसून एक तरफ जहां आनंद, उल्लास और…

नहीं रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् विमल भाई, आज दिल्ली एम्स में ली अंतिम सांस

विमल भाई के निधन से हिमालय की एक आवाज गुम हो गई दिल्‍ली, 15 अगस्‍त। प्रसिद्ध समाजसेवी, पर्यावरण विद, नदियों को बचाने के लिए जीवन भर संघर्ष करने वाले जुझारू नेता, राष्ट्रीय जनआंदोलनों के संगठन (एनएपीएम) के राष्ट्रीय समन्वयक विमल…

आजादी का अमृत महोत्‍सव : भगवा-भय और तिरंगी यादें

अगस्त 1942 से अगस्त 1947 के बीच का करीब पांच साल का दौर हमारे इतिहास का बेहद अहम हिस्सा रहा है। नौ अगस्त 1942 को ‘भारत छोडो’ आंदोलन से लेकर 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने तक भारत समेत दुनियाभर…

आजादी का 75 वां वर्ष : लोकतंत्र की कठिनाइयां

लोकतंत्र की बदहाली किसी से छिपी नहीं है,लेकिन उसे वापस पटरी पर कैसे लाया जाए? आजादी के 75 वें वर्ष में कुछ माह के अंतराल से दो अति महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनायें हुईं जिनका संबंध देश की सौ प्रतिशत जनता से है। पहली…