Month: August 2020

दामिनी दमक रही घन माहीं

तुलसी-कृत ‘रामचरित मानस’ के ‘किष्किंधा कांड’ में अनूठा प्रकृति चित्रण करते हुए तुलसी बाबा ‘दामिनी’ यानि तडित या बिजली का वर्णन भी करते हैं। क्‍या है यह, ‘दामिनी?’ मानसून के मौसम में गिरती बिजली देखना आम बात है, लेकिन यह…

रक्षा करने के लिए पेड़ों को बांधी जाती है, राखी

सिर्फ सरकारों के भरोसे प्रकृति-पर्यावरण की रक्षा नहीं हो सकती, उसमें समाज को हाथ बंटाना पड़ता है। यह काम यदि किसी अच्‍छी, बरसों पुरानी सामाजिक परम्‍परा की मार्फत होने लगे तो जाहिर है, वे अधिक मजबूत और स्‍थायी होते हैं।…

कोरोना-काल में हारते ‘काल’ के देवता

भले ही कोरोना वायरस से उपजी ‘कोविड-19’ बीमारी दुनियाभर को हलाकान कर रही हो, लेकिन आंकडों को देखें तो इसके ठीक उलट, डर की कोई बात दिखाई नहीं देती। उलटे, ‘कोविड-19’ से होने वाली मौतों को सामान्‍यत: होने वाली मौतों…

भारिया से बूझें, कुपोषण की काट

 9 अगस्त , विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त का दिन पूरी दुनिया के सभी आदिवासी समाज के लोगों को अपनी भाषा – संस्कृति, खान-पान, जीवन शैली व स्वशासन – परम्परा के संरक्षण और विकास के साथ-साथ जल – जंगल –…

जयजगत में निहित है विश्व शांति का संदेश

आचार्य विनोबा भावे की 125 जयंती वर्ष पर‘विनोबा विचार प्रवाह’ में पी.वी.राजगोपाल का व्‍याख्यान 8 अगस्त। शाहजहांपुरदेश में संतों की भूमिका को आचार्य विनोबा भावे  ने जिस ढंग से रखा वह अनुकरणीय है। उनके जीवन में कर्म, ज्ञान और भक्ति…

अब भी भारत के 11 करोड़ आदिवासियों के स्वास्थ्य पर विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के लागू होने का इंतजार

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर विशेष रिपोर्ट गढ़चिरौली ।  ठीक दो वर्ष पूर्व, अगस्त 2018 में, ‘भारत में जनजातीय स्वास्थ्य – खाई कैसे मिटायें? : भविष्य के लिये मार्गदर्शन’ नामक रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर भारत सरकार को प्रस्तुत की…

कश्‍मीर के बाद मंदिर, मंदिर के बाद क्‍या?

भाजपा की राजनीतिक सत्‍ता प्राप्ति की यात्रा को ही देखें तो पता चलता है कि उसने आम लोगों और समाज में सुगबुगा रहे सवालों पर ही उंगली रखी है और नतीजे में शून्‍य से शिखर तक पहुंची है। इसके विपरीत…

अयोध्या के अध्याय की पूर्णाहुति ! अब आगे क्या ?

इस सवाल से कैसे मुक्त हुआ जा सकता है कि लाखों की संख्या वाले साधु-संत, उनके करोड़ों शिष्य और भक्तों के साथ वे अनगिनत कार्यकर्ता जो मंदिर-निर्माण के कार्य को अपने संकल्पों की प्रतिष्ठा मानते हुए इतने वर्षों से लगातार…

‘डूबत खातों’ की भरपाई के लिए बैंकों ने लगाए मनमाने शुल्क

विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे (कु) ख्यात व्यापारियों की मार्फत डूबे बैंकों के हजारों करोड़ रुपयों ने ‘एनपीए’ यानि डूबत खाते को सार्वजनिक बहस-मुबाहिसों का मुद्दा बना है। देश की अर्थव्यवस्था के साथ हुए इस खुले खेल ने बैंकों…

परमाणु बम : आत्म-रक्षण का नहीं विनाश का अस्त्र है

6 अगस्त 2020 ‘हिरोशिमा दिवस’  : तबाही के 75 साल युद्ध, और वह भी परमाणु युद्ध की मार्फत अपने तमाम अडौसी-पडौसियों को सीधा कर देने के लिए बावले होते आज के कथित ‘देशभक्‍तों’ को 75 साल पहले जापान के हिरोशिमा (6अगस्‍त)…