Tribal rights

संविधान बनाम खनन : पचामा दादर में पर्यावरणीय न्याय की परीक्षा

मध्यप्रदेश के बालाघाट स्थित पचामा दादर बॉक्साइट ब्लॉक की प्रस्तावित खनन परियोजना पर्यावरणीय मानकों, जल संसाधन आकलन और वनाधिकार प्रावधानों की गंभीर अनदेखी के आरोपों में घिर गई है। अधूरी ईआईए रिपोर्ट, घटते भूजल स्तर, समृद्ध जैव विविधता वाले वन…

वन अधिकार कानून और वन संरक्षण अधिनियम आदिवासी हितों का पूरक

वनवासियों के आवास अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम और वन संरक्षण अधिनियम के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसा ढांचा तैयार किया जाए जिससे वनवासी समुदाय को आवास का…

मध्यप्रदेश जलवायु परिवर्तन कार्य योजना पर जबलपुर में क्षेत्रीय जन संवाद सम्‍पन्‍न

जबलपुर, 17 अक्‍टूबर। मध्यप्रदेश जलवायु परिवर्तन कार्य योजना पर एक क्षेत्रीय जन संवाद विभिन्न समुदायों के साथ काम कर रही संस्थाओं और संगठनों के साथ यूथ होस्टल, जबलपुर में संपन्न हुआ। जिसमें दलित आदिवासी, आदिवासी किसान, वन अधिकार, घुमंतू समुदाय,…

बालाघाट में आदिवासी समाज का दो दिवसीय ‘घेरा ड़ालो-डेरा डालो’ आंदोलन शुरू

वनग्रामों के विस्थापन के खिलाफ जनसंघर्ष का आह्वान बालाघाट, 8 अक्‍टूबर। वन ग्रामों  को विस्थापित किए जाने सहित जल, जंगल, जमीन और प्रशासनिक मुद्दों को लेकर जन संघर्ष मोर्चा महाकौशल के बैनर तले आज से दो दिवसीय घेरा डालो- डेरा…

पर्यावरणविद् आलोक शुक्ला बोले : हसदेव बचाओ आंदोलन ने देश भर में बढ़ाई पर्यावरण चेतना

भोपाल, 13 जून। हसदेव अरण्य बचाओ आंदोलन ने देशभर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर युवाओं और नागरिक समाज में नई चेतना और सक्रियता पैदा की है। अब केरल से लेकर जम्मू तक युवा पर्यावरण के सवालों पर एकजुट होकर आवाज़…

9 से 24 जून तक ‘जन स्वाभिमान यात्रा’ गुजरेगी बालाघाट और मंडला बहुल गांवों से

आदिवासी क्षेत्रों में शांति और सुशासन की पहल हेतु जन स्वाभिमान यात्रा आरंभ मंडला/बालाघाट। जन संघर्ष मोर्चा महाकौशल द्वारा 9 जून से 24 जून 2025 तक ‘जन स्वाभिमान यात्रा’ निकाली जा रही है। यह यात्रा धरती आबा बिरसा मुंडा की…

मानवाधिकार कार्यकर्ता ईबो मिली ‘लापता’, गिरफ्तारी की आशंका पर सिविल सोसायटी ने उठाए सवाल

28 मई 2025,  सियांग (अरुणाचल प्रदेश)। 11,000 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देश्यीय परियोजना (SUMP) के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार पैरोकार ईबो मिली के अचानक ‘लापता’ होने को लेकर उनके परिजन और सहयोगी गंभीर चिंता…

कागज़ी कार्रवाई और केवाईसी के नाम पर जन-हित योजनाओं में अड़चनें : बड़वानी में हज़ारों आदिवासी हुए लामबंद

“पहले गाँव में व्यवस्था लाओ, फिर केवाईसी माँगो” — आदिवासियों का सरकार से सवाल बड़वानी, 13 मई। मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले में सोमवार को जागृत आदिवासी दलित संगठन के नेतृत्व में हज़ारों आदिवासी महिला-पुरुषों ने रैली निकालकर सरकार की…

वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सरकारी दावों में विरोधाभास : आदिवासियों के अधिकारों पर संकट

मध्यप्रदेश में वन भूमि अतिक्रमण को लेकर सरकारी आंकड़ों और दावों में गंभीर विरोधाभास सामने आया है। एनजीटी में प्रस्तुत हलफनामे में जहां 5.46 लाख हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण की बात मानी गई है, वहीं वन विभाग की रिपोर्टें पुराने…

संरक्षित जंगलों में असुरक्षित आदिवासी

पिछले कुछ सालों से आदिवासियों, वन-निवासियों की एकजुटता, संघर्ष और लगातार बढ़ती ताकत के चलते उनके हित में अनेक कानून बने हैं, सरकारें भी उन्हें संरक्षण देने की घोषणाएं करती रहती हैं, लेकिन क्या सचमुच इन प्रयासों से आदिवासियों का…