Rashtriya Swayamsevak Sangh

सौ साल का ‘आरएसएस’

ठीक एक शताब्दी पहले, 1925 के दशहरे के इन्हीं दिनों में ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ की स्थापना हुई थी। उसके कर्ता-धर्ताओं की नजर में गैर-राजनीतिक, सांस्कृतिक संगठन माना जाने वाला यह अ-पंजीकृत जमावडा अपने जन्म से ही विवादास्पद रहा है। क्या…

विकास की विचारधारा : ‘संघ परिवार’ का संकट

पिछले एक दशक से अधिक वर्षों से देश और कतिपय राज्यों की सत्ता पर काबिज ‘भारतीय जनता पार्टी’ और ‘संघ परिवार’ के अन्य सहमना संगठनों के पास आर्थिक विकास को लेकर क्या सोच है? और क्या उनकी सोच देश को…

क्यों है, बोधगया के महाबोधि मंदिर पर विवाद?

फरवरी से बौद्ध समाज भगवान बुद्ध के निर्वाण-स्थल बोधगया के महाबोधि मंदिर के सामने धरने पर बैठे हैं। वजह है – प्रबंधन में ब्राम्हणवादी तौर-तरीकों का बढ़ता दबाव। इतिहास बताता है कि अपने समय में साक्षात गौतम बुद्ध और बाद…

साम्प्रदायिकता के खिलाफ गांधीजी का ताबीज

हाल के दिनों में देशभर में साम्प्रदायिकता का जहर तेजी से फैला है और नतीजे में समाज का तीखा विभाजन हो रहा है। ऐसे में महात्मा गांधी ही याद आते हैं। वे होते तो ऐसे हालातों में आखिर क्या करते?…

विश्‍वविद्यालय : शिक्षा को पीठ दिखाती सत्ता

हमारे मौजूदा आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक ताने-बाने में, खासकर पिछले दशक में, शिक्षा की जितनी मिट्टी-पलीत हुई है, वैसा सदियों में नहीं हुआ। जाहिर है, इस ‘कमाल’ में देश की सत्ता पर काबिज राजनीतिक जमात की खास भूमिका है। मामला…

मुद्दा : जाति-जनगणना की जरूरत

लोक-कल्याणकारी राज्य में नागरिकों को दी जाने वाली सुख-सुविधाएं समाज के विभिन्न तबकों की आबादी, हैसियत और जरूरत के आधार पर तय की जाती हैं, लेकिन यदि सरकार और नीति-निर्धारकों के पास इन तबकों की आबादी का ठीक आंकडा ही…