‘नमस्ते ट्रंप,’ ‘अबकी बार, ट्रंप सरकार’ और ‘माई फ्रेंड डोनॉल्ड’ की गलबहियों से छिटककर ‘लाल आंखें’ दिखाने वाले चीन और रूस की चापलूसी आखिर उसी अर्थ-नीति की देन है जो हमारे आम, गरीब-गुरबों को आए दिन रुलाती रहती है। क्या…
अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए दुनियाभर में अमन-चैन बरकरार रखने की खातिर बनाई और अमल में लाई जाने वाली विदेश नीतियों के दिन, लगता है, लद गए हैं। आजकल सभी देश अपने-अपने निजी और अक्सर व्यक्तिगत पूंजी के स्वार्थों…
सिर्फ भूख ही नहीं, भोजन भी हमें बीमार करता है। असीमित, अस्वास्थ्यकर खान-पान और कथित आधुनिक रहन-सहन हमें लगातार मोटापे की चपेट में फांस रहे हैं। यह बीमारी इस हद तक पहुंच गई है कि खुद देश के प्रधानमंत्री तक…
कृषि अर्थव्यवस्था के जानकार मानते हैं कि खेती को बरकरार रखने, विकसित करने और सबका पेट भरने की अधिकांश जिम्मेदारी छोटे और सीमांत किसान ही निभाते हैं। जहां 70% ग्रामीण परिवार अभी भी अपनी आय के प्राथमिक स्रोत के रूप…
प्रधानमंत्री ने अपनी हाल की बनारस यात्रा के दौरान कोरोना महामारी के देश भर में श्रेष्ठ प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को सार्वजनिक रूप से बधाई दी थी। उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे प्रधानमंत्री के वर्ष 2022 के स्वतंत्रता…
इस कठिन समय में इस्तीफ़े की मांग करने की बजाय देश का नेतृत्व करते रहने के लिए प्रधानमंत्री को इसलिए भी बाध्य किया जाना चाहिए कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी अपने स्थान पर किसी और विकल्प की स्थापना के लिए…
केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों का विरोध, फायदे की उस खेती की संजीवनी बूटी या पारस पत्थर के इर्द गिर्द सिमट गया है जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) कहा जाता है। यह कुछ फसलों पर ही लागू है…
जब देश को ही सरकार से कुछ जानने की ज़रूरत नहीं पड़ी है तो फिर राहुल गांधी अकेले को चीनी हस्तक्षेप और पीएम कैयर्स फंड आदि की जानकारी को लेकर अपना करियर और कांग्रेस का भविष्य दांव पर क्यों लगाना…
सवाल केवल इतना भर नहीं है कि प्रधानमंत्री ने दलाई लामा को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएँ प्रेषित नहीं कि जबकि पिछले वर्ष बौद्ध धार्मिक गुरु को उन्होंने फ़ोन करके ऐसा किया था। तो क्या पंद्रह जून को पूर्वी लद्दाख़ में…