labour

कौसानी चाय बागान : किसानों के शोषण की अनसुनी कहानी

विपिन जोशी की रिपोर्ट कौसानी की चाय अपनी अनूठी सुगंध और गुणवत्ता के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है, जो उच्च कीमतों पर बिकती है। लेकिन इस चाय को आपके प्याले तक पहुंचाने वाले गरीब किसानों और श्रमिकों को उनके…

बुनकरों की बदहाली : दवा के साथ दुगना होता मर्ज

हथकरघा उद्योग आज भी रोजगार का एक कारगर साधन है, लेकिन हमारी सरकारें और उनकी नीतियां उसे अपेक्षित महत्व नहीं देतीं। नतीजे में यह उद्योग ठप्प होता जा रहा है। फिलहाल क्या हालत है, हथकरघा उद्योग की? सात अगस्त, 1905 को…

क्या गांधीवादियों को राजनैतिक दलों से सहयोग लेना चाहिए?

आम धारणा है कि सामाजिक कार्यकर्ताओं,खासकर गांधीवादियों को राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहिए, लेकिन क्या बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के कोई सामाजिक काम किया जा सकता है? कई गांधीवादियों का मानना है कि सत्ता की राजनीति में लगे दलों का…

बर्बाद होता अनाज और बेकार होता ‘अन्‍नदाताओं’ का श्रम

भरपूर उत्‍पादन और तीखी भुखमरी के बीच की उलटबासी के मैदानी अनुभवों की एक बडी वजह हर साल होती अनाज की बर्बादी और उसके लिए जरूरी भंडारण का अभाव है। अनाज की बर्बादी हमारे यहां सालाना होने वाली एक शर्मनाक…

कम्पनियों का मुनाफा रोकने से लौट सकती है, आर्थिक खुशहाली?

कोरोना के बाद हमें अपनी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्‍यवस्‍थाएं पटरी पर लाने के लिए क्‍या–क्‍या करना होगा? मसलन-क्‍या हम मजदूरों के काम के घंटों समेत कई तरह की कानूनी सुविधाओं को निरस्‍त करने की तर्ज पर कंपनियों के मुनाफे…