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रूस के चित्रकार ने गांधीजी पर आधारित अद्वितीय 7000 दुर्लभ छवियों की कलाकृति कोलाज भारत को अर्पित की

नई दिल्ली, 26 सितंबर। महात्‍मा गांधीजी के जीवन से जुड़ी लगभग 7000 दुर्लभ छवियों को एक वर्ष की कठिन साधना से कोलाज कला के रूप में साकार करने वाले रूस के प्रख्यात चित्रकार इगोर अनातोलेविच प्शेनित्सिन (निझ्नी नोवगोरोद) Igor Anatolievich…

अकेलापन और अवसाद : नई सदी की सबसे बड़ी चुनौती

अकेलापन अब सिर्फ़ भावनात्मक अनुभव नहीं रहा, बल्कि यह धूम्रपान और मोटापे जितना घातक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह युवाओं में आत्महत्या के जोखिम को कई गुना बढ़ाता है और बुजुर्गों में हृदय रोग व डिमेंशिया का बड़ा कारण…

जीवन शैली : मोटापे की मार

तीसरी दुनिया के देशों में भूख और कुपोषण सर्वाधिक चर्चा में रहते हैं, लेकिन कथित आधुनिक जीवन-शैली के चलते जरूरत से ज्यादा भोजन भी आजकल संकट पैदा करने लगा है। क्या होते हैं, इसके नतीजे? डॉ. नमिता शर्मा मोटापा, स्थूलता, ओबेसिटी यानि…

सार्वजनिक संस्थानों में नौकरियों की आउटसोर्सिंग शोषण का जरिया नहीं बन सकती : सुप्रीम कोर्ट

राज कुमार सिन्हा  बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले संविदाकर्मियों का मुद्दा गर्मा गया है। कुछ दिन पहले पटना में  संविदा कर्मचारी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में अपनी नौकरी पक्की करने और बकाया वेतन की मांग को लेकर, लगभग…

विचार : भविष्य में युवा राष्ट्र से कहीं बूढ़ा भारत न बने!

देश की जनसंख्या को लेकर कोई भी टिप्पणी प्रतिक्रिया की वजह बनती है। हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हर परिवार को तीन बच्चे पैदा करना चाहिए। इसके पीछे भी उन्होंने एक कारण बताया। संभव है…

विनोबा जयंती : सरकार नियामत नहीं बरसाती

विनोबा भावे की जयंती हमें याद दिलाती है कि सत्ता की राजनीति से ऊपर उठकर सेवा ही जीवन का सच्चा उद्देश्य है। उनका विचार था कि गांव का भला गांव के लोगों के हाथ में है, न कि केवल सरकार…

क्‍या हैं, ‘नई शिक्षा नीति’ के लक्ष्‍य : ‘विश्‍वगुरु’ या सस्‍ता श्रम?

कोविड-19 से बदहाल देश के सामने, बिना किसी संतोषजनक संवाद, बातचीत के, हड़बड़ी में लाई गई ‘शिक्षा नीति-2020’ आखिर क्‍या उपलब्‍ध करना चाहती है? क्‍या यह तेजी से बढ़ती निजी पूंजी को और बढाने की खातिर सस्‍ते मजदूरों की व्‍यवस्‍था…

भय-मुक्ति स्वाधीनता का मूल है

73वें ‘स्‍वतंत्रता दिवस’ (15 अगस्‍त) पर विशेष स्‍वाधीनता, स्‍वावलंबन और भय-मुक्ति मानव सभ्‍यता की बुनियाद हैं। इन्‍हें साधना, एक सम्‍पन्‍न समाज और सभ्‍यता के निर्माण के लिए बेहद जरूरी है। प्रस्‍तुत है, इसी विषय पर प्रकाश डालता अनिल त्रिवेदी का यह लेख। आज़ादी, स्वाधीनता, फ्रीडम, स्वतंत्रता…

क्या ऐसी ‘हिंसक अराजकता’ के साथ ही जीना पड़ेगा ?

क्या पत्रकार होना न होना भी पत्रकारिता जगत की वे सत्ताएँ ही तय करेंगी जो मीडिया को संचालित करती हैं, जैसा कि अभिनेता के रूप में पहचान स्थापित करने के लिए फ़िल्म उद्योग में ज़रूरी है ?अगर आप सुशांत सिंह…

कोरोना संकट पर सामान्‍य ज्ञान

कोरोना वायरस ने इन दिनों दुनियाभर में खलबली मचा दी है। अमीर-गरीब, ऊंचा-नीचा, काला-गोरा, गरज कि हर नस्‍ल और फितरत के इंसान को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है। इससे कैसे निपटा जाए? यह सभी को बार-बार बताया…