जलवायु-परिवर्तन सरीखे वैश्विक संकटों के लिए जिस उद्योग को सर्वाधिक गरियाया जाता है वह कोयले को जलाकर पैदा की जाने वाली बिजली यानि ताप-विद्युत या थर्मल पॉवर है। हमारे राजनेता गरियाने की इसी रौ में वैश्विक मंचों से तरह-तरह के…
यह जानना विचित्र और बेहद दुखद है कि मधुमेह diabetes की बीमारी अब बच्चों को भी विस्तार से अपनी गिरफ्त में ले चुकी है। पहले इस बीमारी को अमीरों, उम्रदराजों और खाए-अघाए लोगों की आफत माना जाता था,लेकिन आंकड़े बताते…
अंग्रेजों और चंद तरक्की-पसंद हिन्दुस्तानियों की पहल पर लगभग एक सदी पहले बाल-विवाह विरोधी कानून बना था, लेकिन देश के किसी राज्य में आज तक बाल-विवाह पर कोई कारगर प्रतिबंध नहीं लग पाया है। देश के अधिकांश राज्यों में, कुछ अपवादों…
दिनों-दिन बढ़ते-फैलते शहर धीरे-धीरे हमारे जीवन के विपरीत और असहनीय होते जा रहे हैं। कोविड-काल में हजारों-हजार मजदूरों ने महानगरों से वापस अपने-अपने गांवों की ओर लौटकर इसकी तस्दीक भी की है। तो क्या शहरों को छोड़कर जीवन की कोई…
सत्तर के दशक से जोर पकड़ते पर्यावरण-प्रदूषण ने अब ऐसे ‘जलवायु परिवर्तन’ climate change तक की यात्रा पूरी कर ली है जिसमें माताएं बच्चों को जन्म तक देने से बचना चाहती हैं। उनका कहना है कि प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध…
देश में परंपरागत ज्ञान की कमी नहीं, इसका सही तरीके से इस्तेमाल होना जरूरी भोपाल, 5 मार्च। सार्वभौमिक स्वास्थ्य को लोगों तक पहुंचाने के लिए जिस तरह निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, उसने स्वास्थ्य की समस्या को और…
इंदौर/भोपाल 2 मार्च। वर्तमान राज्य सरकार का आखरी बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जन स्वास्थ्य अभियान,मध्यप्रदेश ने सरकार से मांग की है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बजट आवंटन में पर्याप्त वृद्धि की जाए और…
दुनियाभर में कमोबेश माना जाने लगा है कि या तो कोविड-19 लगभग समाप्त हो गया है या फिर हम उसके साथ जीने के लिए तैयार हो गए हैं, लेकिन हाल के कुछ शोध बता रहे हैं कि कोविड ने एक…
कहा जाता है कि राजनीति का कुल मतलब ‘रोटी’ और ‘सर्कस’ होता है, लेकिन लगता है, मौजूदा सत्ता केवल ‘सर्कस’ को ही अहमियत दे रही है। नतीजे में एक तरफ भुखमरी, बेरोजगारी, बीमारी जैसी व्याधियां हैं, तो दूसरी तरफ, रोज…
हाल के ‘कोविड-19’ ने एक बार फिर उजागर कर दिया है कि हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर हैं। क्या है, जिसके चलते हम सस्ती, सर्वसुलभ और सेवाभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर नहीं कर पाते? एक कारण है, सरकारी…