GDP

भारतीय अर्थव्यवस्था : किनके लिए अर्थ-व्यवस्था ? 

अखबारों में भले ही ‘तीन ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था’ बताकर हमारे देश को आर्थिक रूप से श्रेष्ठ देशों की पंक्ति में शामिल बताया जाता हो, लेकिन मैदानी हालात खस्ता हैं। इसकी बानगी के लिए इतना जानना ही काफी है कि देश…

बढ़ता तापमान : गर्मी से गहराता संकट

नई सरकार के गठन की आपाधापी में राजधानी दिल्ली समेत देश के अनके इलाके अपने जल संकट और उबलती गर्मी की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं खींच पाए। दिनों-दिन गहराते ये संकट क्या केवल राजनीतिक खींचतान की वजह से ही हैं?…

अंतर्राष्‍ट्रीय : ट्रंप की ताजपोशी से बढ़ेगा धरती का तापक्रम

बीस जनवरी 2025 को होने वाली अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताजपोशी राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल के अलावा पर्यावरण को भी भारी संकट में डाल सकती है। ट्रंप ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी अरुचि पिछले कार्यकाल में ही…

मौसम की मार : बीमा और तकनीक में फंसा किसान

जिस कृषि क्षेत्र की बदौलत कोविड-19 की त्रासदी के बावजूद हमारा ‘सकल घरेलू उत्पाद’ यानि ‘जीडीपी’ उछलता नजर आ रहा था, उसी कृषि क्षेत्र को अब मौसम की मार झेलनी पड रही है और उसकी मदद को कोई नहीं है।…

आखिर जीडीपी क्या बला है ?

कृषि से केवल 16% जीडीपी आती है जब कि उसमें 65% लोग कार्यरत है और कृषि समेत कुल अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत लोग 92 % है जबकि इससे जीडीपी में केवल 54 % आती है। इस प्रकार जीडीपी का मोटा…

कोविड-19 : कुछ सबक, कुछ सवाल

कोविड-19 को ‘परास्‍त’ करने की आपाधापी में कई तरह की गफलतें हो रही हैं और ऐसे में सरकारें अपनी-अपनी ‘पीठ ठुकवाने’ में मशगूल हैं। कहा जा रहा है कि महामारी मानी जाने वाली इस बला से हम अव्‍वल और बेहतर…

देश में स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीयकरण की जरूरत

कोरोना के बाद का भारत विषय पर आयोजित 4  दिवसीय वेवनार सम्‍पन्‍न समाजवादी समागम, वर्कर्स यूनिटी, जनता वीकली, पैगाम, बहुजन संवाद द्वारा कोरोना के बाद का भारत विषय पर आयोजित 4  दिवसीय वेवनार के अंतिम दिन योगेंद्र यादव, हरभजन सिंह…

कम्पनियों का मुनाफा रोकने से लौट सकती है, आर्थिक खुशहाली?

कोरोना के बाद हमें अपनी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्‍यवस्‍थाएं पटरी पर लाने के लिए क्‍या–क्‍या करना होगा? मसलन-क्‍या हम मजदूरों के काम के घंटों समेत कई तरह की कानूनी सुविधाओं को निरस्‍त करने की तर्ज पर कंपनियों के मुनाफे…