Gandhi

गांव, गरीब और पेड़ के लिए सत्याग्रह

पांच जून को गांधी विचार को मानने वाले देशभर के अनेक लोगों ने दो अक्‍टूबर, गांधी जयन्‍ती और ‘विश्‍व अहिंसा दिवस’ तक चलने वाले एक-एक दिन के उपवास की शुरुआत की थी। यह उपवास श्रमिकों, किसानों, ग्रामीण-अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को…

जलवायु परिवर्तन और परचून की दुकानें

सोपान जोशी दो दर्जन सालों में ’विकास’ लगातार बढ़ता ही रहा है। हम अपनी ही बनाई सीमा में रहने के लिए कतई तैयार नहीं है। 1.5 डिग्री सेल्सियस का अंतर जलवायु में आया है वह गर्मी-सर्दी के उतार-चढ़ाव से कहीं…

स्वयं की मुक्ति का उदघोष

हम राजनीतिक रूप से स्वतंत्र अवश्य हो गए हैं परंतु अभी भी मानसिक तौर पर उपनिवेशवाद की स्थिति से मुक्त नहीं हो पाए हैं। इस बीच कारपोरेटीकरण एवं वैश्वीकरण ने नए तरह के उपनिवेशवाद को हमारे ऊपर लाद दिया है।…

गांधी तो अभी भी प्लेटफ़ॉर्म पर ही हैं, उनका केवल देश बदला है !

श्रवण गर्ग अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास स्थान ‘व्हाइट हाउस’ के सामने की एक सड़क का नाम बदलकर ‘’Black Lives Matter”(अश्वेतों का जीवन मायने रखता है) कर दिया गया है।पाँच जून को दिन के उजाले में बड़े-बड़े शब्दों में समूची चौड़ी…

‘कोविड-19’ में एकांगी अध्यात्म

कोविड-19 के कारण लगे ‘लॉक डाउन’ ने हमारे ‘वस्‍तुओं’ के भौतिक संसार की अपर्याप्‍तता के साथ-साथ आंतरिक, आध्‍यात्मिक संसार के सतहीपन की पोल भी खोल दी है। ऐसे में कई आध्‍यात्मिक कहे जाने वाले लोग अवसाद, डर और दुख को…

मतभेद निपटाने की गांधी की कला

एक तरह से देखें तो गांधी का समूचा जीवन मतभेदों से निपटते ही बीता, भले ही वे मतभेद संगी-साथियों, परिवार और धुर विरोधी विचारों के हों या फिर अपने हित साधने में लगी देशी-विदेशी सत्ताओं के। इन मतभेदों से निपटने…

संकट में साबरमती आश्रम

क्या गांधी को कोई ‘वल्र्ड क्लास’ बना सकता है? सब जानते हैं कि गांधी ने बार-बार अपने जीवन को ही अपना संदेश निरूपित किया है, यानि वे जहां, जैसे रहे-बसे, वह उनके संदेश के दर्जे का हो गया। आजकल अहमदाबाद…

गांधी की प्रासंगिकता

गांधी के विचार आज के दौर में कितने कारगर हैं? उनका पालन करके क्या हम वापस पुराने समय में तो नहीं चले जाएंगे? गांधी की सीख को लेकर उठने वाले ये सवाल मौजूदा समय में सर्वाधिक प्रासंगिक और जरूरी हो…

महात्मा गांधी का कश्मीर

पांच अगस्त को धारा-370 के अनेक प्रावधानों के निलंबन के बाद देशभर में कश्मीर के इतिहास को लेकर बहस-मुबाहिसे जारी हैं। आजाद भारत में कुल जमा साढ़े पांच महीने ही सांस ले पाने वाले महात्मा गांधी को भी इसमें बख्शा…

हिंसक समाज में गांधी

गांधी के अहिंसक तौर-तरीकों से आजाद हुए हमारे देश में अब हिंसा व्यापक और गहरे रूपों में हर कहीं मौजूद है। अहिंसा को स्थापित करने में लगे कुछ लोगों को समाज ने हाशिए पर बैठा दिया है। ऐसे में विकास…