नई सरकार के गठन की आपाधापी में राजधानी दिल्ली समेत देश के अनके इलाके अपने जल संकट और उबलती गर्मी की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं खींच पाए। दिनों-दिन गहराते ये संकट क्या केवल राजनीतिक खींचतान की वजह से ही हैं?…
दुनिया भर में सम्पन्नता मापने का प्रचलित पैमाना ‘सकल घरेलू उत्पाद’ (जीडीपी) ‘आर्थिक वृद्धि दर’ से ही उपजा है, लेकिन क्या यह किसी देश की वास्तविक सम्पन्नता को उजागर कर सकता है? इसी पैमाने पर अमरीका को यूरोप से अधिक…
कई अध्ययनों में बताया जा रहा है कि 2024 का साल ज्ञात इतिहास का सर्वाधिक गरम साल रहा है। ऐसे में इंसानी वजूद के लिए क्या किया जाना चाहिए? विकास की मौजूदा खाऊ-उडाऊ अवधारणा को फौरन से पेश्तर बदल डालने…
मानव सभ्यता प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर उन्नत तो हुई है, किन्तु हमारी ऊर्जा की खपत भी बढ़ती जा रही है। यदि इसी तरह ऊर्जा के परम्परागत साधनों का उपयोग बढ़ता गया, तो भविष्य में भयानक ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा।…
सब जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन की मौजूदा त्रासदी की वजह धरती पर बसे इंसानों की हवस पर आधारित जीवन-पद्धति है, लेकिन कोई इसे रोकना, बदलना नहीं चाहता। वैश्विक स्तर पर भी ठीक यही हालत है और तरह-तरह के जमावडों…
इन्फ्लुएंसमैप एक लंदन स्थित थिंक टैंक है, जो ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों पर विश्लेषण प्रदान करता है, व्दारा हाल ही में किये एक ताज़ा शोध से पता चलता है कि फेसबुक पर जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) से…