ENVIRONMENT & FOREST RIGHTS

धरती के सच्चे सेवक: ट्री-मेन दरिपल्ली रामैया

दरिपल्ली रामैया का जीवन पर्यावरण संरक्षण की जीवंत मिसाल रहा। उन्होंने अकेले ही एक करोड़ से अधिक पौधे रोपकर बंजर ज़मीनों को हरित बना दिया। बीज जेब में और पौधों का सपना आंखों में लिए वे जीवन भर पेड़ लगाते…

सुप्रीम कोर्ट से संवैधानिक अधिकार : मौसम और मजदूरी पर फैसले

आज के समय में जलवायु परिवर्तन और बेरोजगारी के मुद्दे हमारे सामने मुंह बाए खड़े हैं, इनसे निपटने के लिए सुप्रीमकोर्ट के फैसले भी मौजूद हैं, लेकिन किन्हीं अनजानी गफलतों, हितों या भूल जाने की राष्ट्रीय बीमारी के चलते उन्हें…

लद्दाख : पहाड़ों, नदियों के विनाश के खिलाफ व भविष्य के लिए खड़े होते लोग

पिछले 2 महीनों से 3 लाख आबादी वाले लद्दाख की 10 प्रतिशत आबादी यानि 30 हज़ार से भी ज़्यादा लोग, अपने जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण, अपने रोजगार और समाज और अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं! लद्दाख की 90% आबादी आदिवासी…

नदियों और नदी घाटी समाजों के अधिकारों की सुरक्षा को चुनावी एजेंडे में शामिल किया जाये

देश-भर के आंदोलनों ने की मांग देश के अलग अलग भौगोलिक क्षेत्रों के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय के  राष्ट्रीय नदी घाटी मंच द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में केंद्र और राज्य सरकारों की विकास संबंधित…

पर्यावरण के खतरों से निरंतर आगाह करने में मीडिया की भूमिका महत्‍वपूर्ण

बदनावर में पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन बदनावर, 25 जनवरी। पर्यावरण डाइजेस्ट मासिक पत्रिका के प्रकाशन के गौरवशाली 37 साल पूरे होने के अवसर पर बुधवार शाम यहां चंद्रलीला पैलेस में बदनावर नगर परिषद के सहयोग से पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन…

पुनर्जीवित नदी पार्बती के प्रेम और सैरनी के शेरों का बुलावा

18, 19 और 20 मई को सैरनी के तट पर जल योद्धाओं का मिलन सम्‍मेलन चंबल घाटी की सूख चुकी सैरनी नदी अब शुद्ध सदानीरा होकर बह रही है। मई के माह में भी सैरनी नदी में पूर्णतः जल प्रवाह…

खतरे में आदिवासी : विकास की अवधारणा का शिकार

भारत में निवास कर रहा आदिवासी समुदाय ’’विकास’’ की आधुनिक अवधारणा का शिकार होकर धीरे-धीरे अपने पारंपरिक रहवास से बेदखल हो रहा है। बांध से लेकर खनन तक, समस्त परियोजनाओं की सबसे ज्यादा मार आदिवासियों पर ही पड़ती है। पुष्पा…